वरिष्ठ इतिहासकार केडी शर्मा बताते हैं कि जैसे ही दिल्ली से आजादी का एलान हुआ तो मेरठ भी तिरंगों से पट गया। हर किसी के हाथ में तिरंगा और चेहरे पर आजादी की खुशी थी। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या नौजवान सभी आजादी का जश्न मना रहे थे। 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी का जश्न मेरठ में दो जगह मनाया गया था। पहले सभी लोग गांधी आश्रम पर एकत्र हुए, इसके बाद पीएल शर्मा स्मारक में शाम को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। देर रात तक मेरठ के लोग आजादी की खुशियां मनाते रहे।
भारत माता के जयकारों से गूंज उठा शहर
आजादी की खुशियां मनाने के लिए मेरठ में लोगों ने झांकियां और जुलूस निकाले। भारत माता, वंदे मातरम् के जयकारों से मेरठ गूंज उठा था। 14 अगस्त की रात जोरदार बारिश हुई थी। 15 अगस्त की सुबह धूप खिल गई थी।
ऐसे पड़े थे फूल, मानो कोई त्योहार हो
केडी शर्मा बताते हैं कि सदर और लालकुर्ती जैसे बाजारों में फूल ही फूल पड़े हुए थे। मकानों पर फूल की मालाएं और पत्तियों की लड़ियां ऐसे लटकाई गई थीं, मानो कोई त्योहार हो।
शहीद स्मारम में शिलालेख पर अंकित हैं 85 शहीदों के नाम
मेरठ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले 85 सैनिकों के नाम यहां शहीद स्मारक पर शिलालेख पर अंकित हैं। सफेद मार्बल से बना यह स्मारक 30 मीटर ऊंचा है और इसका निर्माण 1857 में शहीद हुए भारतीय सिपाहियों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। 1857 की क्रांति में कोतवाल धनसिंह का अहम योगदान था। क्रांति के समय अंग्रेज अफसरों के आदेश के बावजूद उन्होंने क्रांतिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी।
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