प्रश्न : आपको विदेश जाने की जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर : मेरठ कॉलेज से एमए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सोचा कि क्या करना चाहिए। कक्षा सात में राहुल सांकृत्यायन की पुस्तक ‘अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा’ पढ़ी थी। गांव के सरल हृदय जमींदार ने मदद की। ब्रिटेन जाने का रास्ता साफ हो गया। लंदन में श्रम और पढ़ाई दोनों साथ-साथ की। हार्वर्ड विश्वविद्यालय में रूसी भाषा पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति मिली। इसके बाद कई विश्वविद्यालयों में भारतीय संस्कृति, हिंदी, रूसी के साथ भारतीय इतिहास राजनीति का अध्यापन किया। प्रवासी भारतीयों पर शोध किया।
वटुक के प्रमुख प्रकाशित काव्य ग्रंथ एवं अन्य रचनाएं
त्रिविधा, बंधन अपने, देश पाराया, कैदी भाई बंदी देश, आपात शतक, नीलकंठ बन न सका, एक बूंद और, कल्पना के पंख पाकर, रात का अकेला सफर, नये अभिलेख का सूरज, बांहों में लिपटी दूरियां, सहस्रबाहु, अनुगूंज, इतिहास की चीख, बाहुबली, उत्तर रामकथा, अभिशप्त द्वापर, मानवता का अरण्य रोदन, और ईसा मरता रहा के साथ गद्य में हिंदी-हिंदी कितना जानी, अनलिखा रह गया इतिहास, गदर पार्टी का इतिहास, मेरी इसराइल डायरी, शहीद न होने का दुख।