हाईकोर्ट बेंच: मुद्दा है मुद्दे का क्या
चुनाव आने पर चर्चाएं खूब होती हैं, पर कुल जमा हासिल कुछ भी नहीं
मेरठ में खुल जाए बेंच तो पश्चिमी यूपी के लोगों को मिले राहत
अरीश रिज़वी
मेरठ। पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच। ये मुद्दा चुनाव आने पर हर बार खूब चर्चा में रहता है। मेरठ में बेंच खुल जाए तो पश्चिमी यूपी के लोगों को राहत मिलेगी, पर अभी तक कुल जमा हासिल कुछ भी नहीं।
हाईकोर्ट बेंच की मांग सबसे पहले 1956 में नेशनल कांफ्रेंस के अधिवक्ताओं ने उठाई थी। इसके बाद प्रदेश में सन 1976 में नारायण दत्त तिवारी की सरकार थी और उन्होंने भी खंडपीठ की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा पश्चिम में बेंच की स्थापना को लेकर सन 1986 में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने भी संसद में मांग उठाई थी। उसी साल विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज ने भी संसद में बेंच को लेकर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि हमारी सरकार सैद्धांतिक रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना की जरूरत स्वीकार करती है। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी पश्चिम में बेंच की स्थापना के लिए जसवंत सिंह आयोग का गठन किया था। आयोग ने भी बेंच स्थापना को जरूरी माना था। जनता दल के शासन में रामनरेश यादव के अलावा बनारसी दास व मायावती ने भी अपने शासन के दौरान खंडपीठ की स्थापना की मांग का प्रस्ताव पारित किया और अपनी संस्तुति प्रदान कर केंद्र सरकार को भेजा था। पिछले करीब 37 सालों से बेंच की मांग को लेकर आंदोलन हो रहे हैं। हर बुधवार और शनिवार को अधिवक्ता अपनी मांग को लेकर न्यायिक कार्य से विरत भी रहते हैं। लोगों की मुखर मांग है कि यह बेंच मेरठ में ही बने क्योंकि पश्चिमी उप्र का सबसे बड़ा जिला तो है ही मेरठ, इसका पौराणिक व ऐतिहासिक महत्व भी है। यह प्रमुख औद्योगिक शहर है और यह सबसे पुरानी छावनियों में से एक है।
इसके अलावा वर्तमान सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी हाईकोर्ट बेंच को लेकर संसद में अपनी बात रख चुके हैं। हालांकि परिणाम अभी ज़ीरो है।
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पाकिस्तान नज़दीक, प्रयागराज दूर
मेरठ से प्रयागराज करीब 637 किमी दूर है जबकि पाकिस्तान का लाहौर सिर्फ 458 किमी। ऐसे ही पड़ोसी राज्यों के उच्च न्यायालय भी प्रयागराज से आधी दूरी पर ही हैं। इनमें दिल्ली, चंडीगढ़, नैनीताल, शिमला, जयपुर व ग्वालियर आदि की दूरी 350 किमी के भीतर ही है। अधिवक्ताओं और लोगों का कहना है कि मेरठ में बेंच मिल जाए तो समय की बर्बादी और पैसे की बचत दोनों होंगी।
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हाईकोर्ट में 12 लाख से ज़्यादा मुकदमे लंबित
हाईकोर्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों के सिविल व क्राइम के 7.50 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। हर माह बड़ी संख्या में पश्चिम के लोगों को प्रयागराज अपने मुकदमों की पैरवी के लिए चक्कर काटना पड़ता है।
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पश्चिम में बेंच से इन जिले के लोगों को होगा फायदा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठ रही है। बेंच की स्थापना से मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर, बुलंदशहर समेत पश्चिम के सभी जिलों की बड़ी आबादी को सुविधा होगी और सस्ता न्याय मिल सकेगा।
यह है बेंच बनाने की प्रक्रिया
हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने के लिए राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार उसे सहमति के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजती है। इस पर एक कोलेजन कमेटी अपनी रिपोर्ट लगाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्यवाही होती है। इसके अलावा केंद्र सरकार चाहे तो वह इस संबंध में एडवोकेट जनरल की विधिक राय लेकर संसद में बिल भी पारित करा सकती है ताकि खंडपीठ का गठन किया जा सके।
कोट्स
इस मांग को लेकर सरकार राजनीतिक दबाव में चलते आंख बंद कर बैठी हुई है। उन्हें क्षेत्र की जनता की समस्याएं दिखाई नहीं दे रही हैं। सरकार को चाहिए कि वो शीघ्र सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट बेंच स्थापित करे।
-कुंवर पाल सिंह, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष
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बेंच की स्थापना का मुद्दा पूर्ण रूप से राजनीतिक बन चुका है। सरकारों को क्षेत्र की जनता की परेशानियों से कोई वास्ता नहीं है, सिविल अपीलों में 14 साल इंतजार करना पड़ता है। 12 लाख पेंडेंसी है। सरकार को तुरंत 3 स्थानों में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करनी चाहिए।
- गजेंद्र पाल धामा, मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष
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सरकार को वादकारियों की और अधिवक्ताओं की परेशानियों को देखते हुए तत्काल हाईकोर्ट बेंच स्थापित करनी चाहिए। सिर्फ एक बेंच नहीं पूरे प्रदेश में चार बेंच स्थापित करनी चाहिए।
-- चौधरी नरेंद्र पाल सिंह, यूपी बार काउंसिल के पूर्व सदस्य एवं मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष
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वर्तमान में केंद्र में और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में पीड़ितों को उनके शीघ्र सस्ते सुलभ संवैधानिक अधिकारों से विरक्त किया हुआ है। सरकार को तत्काल पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना करनी चाहिए।
- रोहिताश्व कुमार अग्रवाल, यूपी बार काउंसिल के सदस्य और मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष