बाहर चीखते-चिल्लाते रहे बेबस परिजन, घर में जिंदा जल गईं मासूम
मेरठ। शाम के करीब सात बजे खंदक बाजार के भीड़ वाले इलाके में इदरीश के 50 गज के मकान में दो मासूम बच्चियों के अकीका के लिए चहलपहल थी। अंदर भट्ठी पर खाना बनाया जा रहा था। इसी बीच गैस बंद हो गई। परिवार की महिला ने जैसे ही माचिस की तीली जलाई तो सिलिंडर ने आग पकड़ ली। महिलाएं तो जान बचाकर बाहर आ गईं, लेकिन अंदर बच्चियां आग की चपेट में आ गईं। मकान आग का गोला बन चुका था। मासूम अंदर जल रहीं थीं और बाहर बेबस परिजन दहाड़े मारकर बिलख रहे थे।
इदरीश के चार बेटे और छह बेटियां है। दो बेटे और दो बेटियां साउथ अफ्रीका में रहते हैं। एक महीने पहले ही बेटी शहला ने एक बच्ची को जन्म दिया। इदरीश के बेटे जुनेद की पत्नी को भी 21 दिन पहले बेटी हुई। दो बच्चियों का जन्म हुआ तो जुनैद और उसकी बहन ने दोनों का अकीका एक साथ रखने का फैसला किया। सोमवार को घर में दावत थी और रविवार को यह हादसा हो गया।
जिगर के टुकड़ों को बचाने के लिए आग में कूदने को तैयार थीं माएं
आग लगने के बार घर से बाहर आईं बच्चियों कइी माएं आग में कूदने को तैयार थीं। उन्हें किसी रतह लोगों ने संभाला। आखों के सामने जिंदा दोनों बेटियां जल गई और परिवार बेबस रहा। आग बुझते ही परिवार के लोग मकान में घुस गए, लेकिन तब तक सामान के साथ दोनों मासूमों का कंकाल ही बचा था। घनी आबादी खंदक बाजार में ये खौफनाक मंजर जिसने भी देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए।
ननद-भाभी बेहोश
भीषण आग में अपनी-अपनी बेटियों को जलता देखकर जुनैद की पत्नी शहीना व उसकी ननद शैला बेहोश हो गई। होश में आईं तो दोनों मासूमों को बचाने के लिए अंदर घुसने की कोशिश करने लगीं। लोगों ने किसी तरह से उन्हें रोका।
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल: जान पर खेल सिलिंडर बाहर खींच लाए लोग
दमकल की गाड़ियां पहुंचने से पहले बालू डालकर आग पर काबू करने की कोशिश
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। इदरीश के घर में आग लगते ही कोहराम मच गया। आग की ऊंची ऊंची लपटें उठ रहीं थी। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और जान जोखिम में डाल आग लगे सिलिंडर को बाहर खींच लाए। यहां लोगों ने बालू डालकर आग को बुझा दिया। मासूब बच्चियों को न बचा पाने का दर्द यहां हर किसी के चेहरे पर दिखा।
खंदक बाजार मिश्रित आबादी का इलाका है। जिस जगह इदरीश का घर बना है। वहां से चंद कदम की दूरी पर हिंदू परिवार भी रहते हैं। लगभग 80 प्रतिशत बाजार बंद हो चुका था। तभी आग लगने का शोर मच गया। लोग उस ओर दौड़ पड़े। परिवार के लोग बाहर खड़े चिल्ला रहे थे। पूछने पर पता चला कि नवजात बच्चियां अंदर हैं। कुछ लोगों ने साहस भी दिखाया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घर का हर कोना आग से घिरा था। इसी दौरान पड़ौसी दिलीप गुप्ता क्षेत्रीय निवासी शोभित की मदद से गैस सिलिंडर बाहर खींच लाए। लोगों ने आग पर काबू पाया। घर की आग भी लोगों ने बुझानी शुरु कर दी। तभी दमकल की दो गाड़ियां आ गई और आग को बुझाया।
देखते ही देखते जमा हो गई भीड़
घर में आग लगने के बाद आस पास के लोग एकत्र हो गए। पूरी सड़क भीड़ से घिर गई। दमकलकर्मियों ने पुलिस की मदद से भीड़ को हटाया। तब जाकर आग बुझाने का काम शुरु हो सका। घर ऐसी जगह पर बना था, जहां तक पहुंचने के लिए दमकल को मशक्कत करनी पड़ी।
अतिक्रमण बना दमकल की मुसीबत
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो आग की भनक लगते ही कुछ लोग बाइक उठाकर बुढ़ानागेट की ओर दौड़ पड़े। उन्होंने जाकर दमकल को घटना की जानकारी दी। तुरन्त ही गाड़ी भी चल दी। लेकिन इस कदर अतिक्रमण रहा कि 500 मीटर की दूरी तय करने में भी दस मिनट लग गए। लोग खासे खफा दिखाई दिए।
रोते रहे पिता
परिवार के हर व्यक्ति का रो रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदारी महिलाएं भी रोती बिलखती पहुंच गई लेकिन तब तक दोनों बच्चियों की मां बदहवास थीं। दोनों सुदबुद खो चुकी थीं। जुनैद और इमरान की हालत भी कुछ ठीक नहीं थी। रोते हुए वह बोल रहे थे कि मुझे बच्ची को दूध पिलाना है, वह बहुत देर से भूखी है।
पूरे समय डटे रहे सीओ कोतवाली
आग में दो मासूमों की मौत की सूचना पर सीओ कोतवाली अरविंद चौरसिया वहां पहुंच गए। उन्होंने लोगों की मदद से दोनों परिवारों को संभाला। आस पास के बुजुर्गों से बात की गई। तय हुआ कि रात में ही दोनों बच्चियों का दफीना होगा। दोनों को कपड़े में लपेट दिया गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में ही उनका दफीना हुआ।
पहले से लीक हो रही थी गैस
सिलिंडर से गैस पहले ही लीक हो रही थी लेकिन किसी न उसकी दुर्गंध पर गंभीरता नहीं दिखाई। घर बेहद छोटा था, जिस कारण गैस पूरे घर में फैल गई। जैसे ही चूल्हा जलाने के लिए माचिस जलाई गई, आग ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया। आग इतनी भीषण थी कि हर कोई बाहर दौड़ा।