फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना मरीजों की सेवा की लगन में दिन-रात भूल गए स्वास्थ्यकर्मी

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना मरीजों की सेवा की लगन में दिन-रात भूल गए स्वास्थ्यकर्मी
विज्ञापन

- अमर उजाला का गणतंत्र के प्रहरी: कोरोना कर्मवीर सम्मान 31 जनवरी को, 26 चुनिंदा हस्तियां चुनी गईं, अमनताश रिजॉर्ट में होगा आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के दौरान जब पूरा देश मुश्किलों से दो-चार थे, अकेला स्वास्थ्य विभाग उनकी सुध ले रहा था। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के साथ-साथ उनके तीमारदारों के अलावा गरीबों, बेसहारा, मजदूरों और जरूरतमंदों का सहयोग करने में सबसे आगे थे। कई चिकित्साकर्मी मानव सेवा के लिए दिन-रात भूल गए।
अमर उजाला ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा समाज के अन्य वर्गो से ऐसी कुल 26 हस्तियां चुनी हैं, जिन्होंने कोरोना काल में तन-मन और धन से निस्वार्थ भाव से सहयोग किया। अमर उजाला द्वारा चुनिंदा लोगों को 31 जनवरी को गणतंत्र के प्रहरी: कोरोना कर्मवीर सम्मान से विभूषित किया जाएगा। समारोह कंकरखेड़ा के समीप अमनताश रिजॉर्ट में आयोजित किया जाएगा।
विज्ञापन

सम्मानित किए जाने वाले स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के सदस्यों की पहली किस्त यहां प्रस्तुत है...
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था बखूबी संभाली
- डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
कोरोना के इलाज और जांच का मुख्य केंद्र एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज है। कोरोना संक्रमण पिछले साल सितंबर में चरम पर था। उस समय इन्हें मेडिकल कॉलेज की कमान सौंपी गई थी। अब ये हालात हैं कि मेडिकल कॉलेज में 10 मरीज भी भर्ती नहीं हैं। डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार से पूरी व्यवस्था को बेहतरीन ढंग से संभाला है।
कोविड अस्पताल की जिम्मेदारी निभाई
- डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य, नोडल अधिकारी, कोविड अस्पताल
मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल के नोडल अधिकारी हैं। मेडिकल कॉलेज में पूरे वेस्ट यूपी के कोरोना संक्रमितों का इलाज किया गया है। इन्होंने नोडल अधिकारी होने के नाते अस्पताल में व्यवस्था बनाई। विपरीत हालात में भी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने से लेकर छुट्टी करके उसे घर भेजने तक का फर्ज बखूबी निभाते रहे।
चिकित्सक होने के नाते फर्ज निभाया
- डॉ. धीरज बालियान व डॉ. सुधीर राठ्री, कोविड अस्पताल के सीएमएस व एसआईसी
कोरोना पीड़ितों के इलाज और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी अब भी इन्हीं की है। दोनों अधिकारी दिन-रात कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे रहते हैं। कोरोना संक्रमण यहां पहुंचा और उसके इलाज की व्यवस्था मेडिकल में करनी पड़ी। इन्हीं की देखरेख में कोविड अस्पताल शुरू किया गया। ये पूरी गंभीरता से जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
लापरवाही न हो, इसलिए ज्यादा सतर्कता
- डॉ. अमित गर्ग, प्रभारी, माइक्रोबायोलॉजी लैब
मेडिकल कॉलेज में कोरोना की जांच की सबसे बड़ी लैब है। अब तक इस लैब में 60 हजार से ज्यादा लोगों के नमूनों की जांच हो चुकी है। इसके अतिरिक्त दूसरे स्ट्रेन की जांच के लिए सैंपल इन्हीं के जरिए दिल्ली भेजे गए। हर वक्त कोरोना मरीजों के सैंपल ही घिरे रहते हैं। कहीं चूक न हो जाए, इसके लिए पूरी सतर्कता बरतते हैं।
अपनी देखरेख में जांच शुरू कराई
- डॉ. राजकुमार, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य
नौ माह तक जब कोरोना संक्रमण चरम पर था। इस दौरान मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) रहे। पूरे जिले की जिम्मेदारी इन्हीं पर थी। एंटीजन की जांच हो या ट्रूनेट के जरिए, सब इनकी निगरानी में ही शुरू हो सकी। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने से लेकर होम आइसोलेशन तक में बढ़-चढ़ कर सहयोग किया।
संक्रमितों के बीच कर रहे ड्यूटी
- दीपक पार्चा, मेडिकल कॉलेज के वार्ड ब्वॉय
कोविड-19 अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के बीच ड्यूटी करते रहे हैं। अब तक यहां भर्ती रहे सैकड़ों मरीज कोरोना को हराकर अपने-अपने घर चले गए। इन सबके बीच हिम्मत और हौसले के साथ ड्यूटी की। अब भी कर रहे हैं। जहां लोग एहतियातन दूरी बनाते हैं, वहां इन्हें ड्यूटी करने से कभी भी डर नहीं लगा।
कम नहीं होने दिया हौसला
- जयकुमार, मेडिकल कॉलेज के सफाई कर्मचारी
कोविड-19 अस्पताल में कोरोना मरीजों के बीच ड्यूटी करते हैं। कई बार मरीजों के गुस्से और चिकित्सकों की नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। बावजूद इसके लोगों की मदद का हौसला कम नहीं होने दिया। हमेशा चिंता रही कि कहीं सफाई में कमी के कारण कोई और इस बीमारी की चपेट में न आ जाए।
दस माह से निभा रहे जिम्मेदारी
धर्मेंद्र कुमार, लैब टेक्नीशियन, जिला अस्पताल
कोरोना के नमूने लेना और उन्हें भेजने की जिम्मेदारी दस माह से निभा रहे हैं। कोरोना मरीजों के नमूने एकत्र करने का मुख्य केंद्र जिला अस्पताल है। यहां से ही नमूने मेडिकल कॉलेज प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे जाते हैं। एहतियात और हिम्मत के साथ डयूटी कर रहे हैं। उन्हें गर्व है कि वह इस सेवा में हैं।
विज्ञापन

मेहनत और ईमानदारी से कर्तव्य निभाया
- रेनू त्यागी और माधवी अग्रवाल, मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स
कोरोना के मरीजों की देखरेख, उनको दवा देना इनकी ड्यूटी है। कोरोना मरीजों के इलाज में नर्स की ़अहम भूमिका रही है। कई मरीज कोरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारियों से भी ग्रसित थे, उन्होंने दवा समय पर ली या नहीं इसका ख्याल रखा। उनका हौसला भी बढ़ाया। दोनों मेहनत और ईमानदारी के साथ ड्यूटी निभा रही हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें