1990 बैच की चिकित्सक डॉ. दीप्ति मलिक अमेरिका के टाउन पेंसिल्वेनिया में हैं। वह इंफेक्शन डिसीज एक्सपर्ट हैं। इसी बैच की दुबई में गायनी की चिकित्सक हैं डॉ. अंशु जैन। 1991 बैच की डॉ. नीतू मोहन अमेरिका में मेडिसिन इंफार्मेटिक हैं। इनका काम मरीज और बीमारी से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर लाना है। वह टेली मेडिसिन को बढ़ावा दे रही हैं।
1990 बैच के ही डॉ. वी विवेक अमेरिका में प्राइमरी केयर चिकित्सक हैं। 1992 बैच के सिंगापुर में डॉ. राशि अग्रवाल हैं। कोलंबिया में डॉ. मेधा गर्ग रेडियोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। यूएसए में डॉ. रुचि श्रेष्ठा यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट पीटर्स बर्ग में रेडियोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ. रेसु बिक्रम इसी यूनिवर्सिटी में चीफ इनोवेशन ऑफिसर हैं। इनके अलावा अमेरिका में डॉ. शक्ति श्रीवास्तव, डॉ. सोनिया और डॉ. श्वेता आदि हैं।
- 1200 से ज्यादा चिकित्सक आईएमए में पंजीकृत हैं।
- पंजीकृत अस्पताल-नर्सिंग होम की संख्या 243 है।
- 12 सीएचसी, 31 पीएचसी और 26 अर्बन हेल्थ सेंटर हैं।
टॉर्च की रोशनी में करने पड़ते थे ऑपरेशन
1978 से आईएमए का सदस्य हूं। इंग्लैंड से मेरठ आया था। 34 साल पहले संसाधन बेहद कम थे। कई बार लाइट जाने पर टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करने पड़ते थे। गंभीर मरीज को देखने घर पर जाया करते थे। अब चिकित्सा क्षेत्र में नए आयाम कायम हो रहे हैं। - वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. बीपी सिंघल
एलएलआरएम से 1977 में एमबीबीएस की थी। 1984 से आईएमए का सदस्य हूं। तब और अब में काफी फर्क आ गया है। तब न तो शुगर और हार्ट की इस तरह की इफेक्टिव दवाइयां थीं और न ही ऐसी तकनीकें और मशीनें। डायलिसिस भी मरीज की घर पर ही होती थी। - डॉ एमके बंसल, वरिष्ठ फिजिशियन