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Meerut News: शरीर में होती है कंपन तो न करें नजरंदाज

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मेरठ। पार्किंसन (पार्किंसंस) की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। अगर किसी व्यक्ति के हाथ, पैर या शरीर के अन्य किसी हिस्से में कंपकपी होती है तो इसे नजरअंदाज न करें। यह पार्किंसंस बीमारी हो सकती है। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 11 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है।
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मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने बताया कि पार्किंसन बीमारी के मामले काफी देखने को मिल रहे हैं। जिले में कोई निश्चित आंकड़ा तो नहीं है लेकिन संख्या काफी है। शुरुआती सालों में इसके लक्षण काफी धीमे होते हैं, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। इसके चार मुख्य लक्षण हैं। इसमें हाथ, बाजू, टांगों, मुंह और चेहरे में कंपकपाहट होना, जोड़ों या धड़ में कठोरता आना, हरकतों में धीमापन और संतुलन व तालमेल बिगड़ना शामिल हैं। शुरू में रोगी को चलने, बात करने और दूसरे छोटे-छोटे काम करने में दिक्कत महसूस होती है। अधिकांश 60 साल से ज्यादा उम्र वाले इसकी चपेट में आते हैं।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेन्द्र किशोर ने बताया कि यह बीमारी तब होती है जब मस्तिष्क के एक क्षेत्र में तंत्रिका कोशिकाएं या न्यूरॉन्स नष्ट होने लगते हैं। आमतौर पर ये न्यूरॉन्स डोपामाइन नामक एक महत्वपूर्ण मस्तिष्क रसायन का उत्पादन करते हैं, लेकिन जब ये न्यूरॉन्स मर जाते हैं या क्षीण हो जाते हैं, तो वे कम डोपामाइन का उत्पादन करते हैं, जो पार्किंसंस रोग का कारण बनता है।
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पार्किंसंस रोग के लक्षण
हाथ, बांह, पैर, जबड़े या सिर में कंपन
अंगों की कठोरता
अंगों की गतिविधियों का धीमा हो जाना
शरीर का संतुलन बिगड़ जाना यानी चलने-फिरने में कठिनाई होना

उपचार
पार्किंसन रोग के परीक्षण के लिए वर्तमान में कोई विशेष जाँच मौजूद नहीं है। तंत्रिका तंत्र की स्थितियों में प्रशिक्षित चिकित्सक मरीज का मेडिकल इतिहास, संकेतों और लक्षणों की समीक्षा और एक न्यूरोलॉजिकल तथा शारीरिक परीक्षण के आधार पर इस रोग का निदान करते हैं।
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