हर तारीख पर आंसू, कभी नहीं भूल पाएंगे
तिहरे हत्याकांड में 16 साल से कोर्ट में सुनवाई चली। सुनील ढाका बागपत के ढिकौली गांव, सुधीर उज्ज्वल बागपत के सिरसली गढ़ और पुनीत गिरी परीक्षितगढ़ के खटकी गांव के निवासी थे। कोर्ट में तारीख पर सुनील के भाई अनिल ढाका, सुधीर के भाई सोनू और पुनित के भाई सतीश लगातार आते रहे हैं।
पुनित के तहेरे भाई अजित वकील हैं, वह तारीख पर सतीश के साथ हर बार जाते हैं। तारीख पर 16 साल पहले घटना को याद करके तीनों परिवार के लोग अक्सर रो पड़ते हैं। वादी अनिल ढाका का कहना है कि आरोपियों ने बड़ी बेहरमी से तीनों युवकों की हत्या की थी। इस वारदात को कभी नहीं भुला पाएंगे।
पुनीत गिरी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
एक आरोपी जेल में बाकी जमानत पर बाहर
तिहरे हत्याकांड के मामले में कोतवाली थाने में मुकदमा अपराध संख्या 190/08 के तहत धारा 147, 148, 149, 364, 302, 201, 404, 411 और 3/2 गैंगस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज है। एक आरोपी शम्मी जेल में है, बाकी आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
बागपत जिले में मिले थे क्षत-विक्षत शव
23 मई 2008 की दोपहर बागपत जिले में बालैनी नदी के किनारे कार में तीन युवकों के शव पड़े मिले। इनकी पहचान सुनील ढाका, पुनीत गिरि और सुधीर उज्जवल के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि 22 मई की रात तीनों की कोतवाली के गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी ने अपने भाइयों और साथियों के साथ मिलकर हत्या की।
शीबा नाम की युवती से इजलाल की दोस्ती थी। पुलिस के आरोप पत्र के मुताबिक शीबा को इजलाल से तीनों युवकों का मिलना पसंद नहीं था। उसने इजलाल को तीनों के खिलाफ उकसाया था। इसी को लेकर इजलाल ने तीनों को गुदड़ी बाजार बुलाया और मार डाला।
आरोपियों के अधिवक्ता की तरफ से उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मुकदमे की सुनवाई के लिए मेरठ से किसी अन्य जिले में कराने के लिए ट्रांसफर प्रार्थना पत्र दिया गया था। न्यायालय ने केस का स्टेटस मांगा था। न्यायालय ने ट्रांसफर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। मेरठ न्यायालय द्वारा निर्णय के लिए 31 जुलाई की तिथि नियत है। - प्रमोद कुमार त्यागी, वादी पक्ष के अधिवक्ता