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Meerut News: अमृत पिए देव.. जो विष पिए वह महादेव

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मेरठ। शताब्दीनगर में बुधवार को चौथे दिन शिव महापुराण कथा सुनाई गई। कथा व्यास प्रदीप मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक अवस्था के बाद में एक अवस्था आती है। शिव महापुराण कहती है कि बचपन गया जाने दो, जवानी गई जाने दो, लेकिन बुढ़ापे को बेकार मत जाने दो। विष पिए वो महादेव कहलाता है। इसी तरह जो घर का बुजुर्ग होता है उसको दुख रूपी विष पीना ही पड़ता है।
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कथा व्यास प्रदीप मिश्रा ने बताया कि किसी भी तरह का दुख हो संकट हो तो एक धतूरा लेकर नंदीकेश (नंदी) से प्रार्थना कर धतूरा चढ़ाने से दुख दूर होते हैं। जिस तरह साठ वर्ष के बाद हस्ताक्षर ऑफिस में नहीं चलते उसी तरह घर परिवार में भी साठ के बाद हस्ताक्षर की इच्छा (रोक-टोक) न रखें। साठ के बाद ठाठ से रहो लेकिन वाणी पर संयम रखो और व्यवहार को परिपूर्ण बनाओ। शिवमहापुराण कहती है कि अपने व्यवहार को बढ़ाइए। व्यवहार होगा तो वाणी की श्रेष्ठता सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि बखान क्या करूं मैं राखो के ढेर का, आयो शरण तिहारी शंभू तार तू।
कर्म आपके कृपा भोलेनाथ की
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सबसे पहले अपने दिमाग में एक बात बैठा लो कि भगवान को पाना हो या संसार में अपना नाम कमाना हो तो इन सब में अपने कर्म को सबसे पहले रखें। ऐसा नहीं है कि आप दुकान में ताला लगाकर कथा में आ कर बैठ गए तो आपको सोने के अंडे मिल जाएंगे। शिवजी कहते हैं कि अपना कर्म सबसे पहले रखिए। अपने मेहनत को चार गुना बढ़ाओ तभी आगे बढ़ पाओगे। कुछ कर्म आपके बाकी कृपा भोलेनाथ की।
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किसी को बुरा कहकर अपना पूरा दिन खराब न करें
अगर आपको किसी ने कुछ अपशब्द कह दिया या कुछ गलत कह दिया तो आपका पूरा दिन खराब हो गया। शिवमहापुराण कहती है कि एक शब्द पर आपका दिन खराब क्यों होगा। किसी के शब्दों से आपको अपना दिन क्यों खराब करना है।
मीठा खाकर मीठा नहीं बोलता इसलिए हो रही शुगर
कथा व्यास ने कहा कि पहले का इंसान मीठा खाता था तो मीठा बोलता था। आजकल इंसान मीठा खाता है लेकिन मीठा नहीं बोलता है। ऐसे में मीठा उसके रक्त में समाहित हो जाता है और शुगर की बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। मीठे का सामंजस्य बनाए रखें। जितना मीठा खाओ उतना ही मीठा बोलो।
घर की लक्ष्मी का आदर तभी लक्ष्मी का वास
कथा व्यास ने बताया कि तैंतीस कोटि देवताओं में केवल भगवान शंकर ऐसे हैं, जिनकी पत्नी का स्थान उनसे भी ऊपर है। उनके घर में रिद्धि भी है और सिध्दि भी है। शुभ-लाभ भी है और शांति भी है। इसीलिए समृद्धि चाहते हैं तो अपनी स्त्री का स्थान अपने से भी ऊपर रखो। घर की लक्ष्मी का आदर होगा तभी लक्ष्मी का वास होगा।
शिव तत्व पर आश्रित रहो
क्या किसको रोइए, चादर तान के सोइए। शिव तत्व पर आश्रित रहो। कभी किसी से ईर्ष्या मत करो। कुछ भी हो अपनी मस्ती में रहो। कोई कुछ भी कहे आगे बढ़ते रहो। खेल के मैदान में जनता शोर मचाती रहती है और खिलाड़ी केवल अपना कर्म करता रहता है।

आधी भक्ति सनातन की पहचान नहीं
कथा व्यास ने कहा कि दुनिया में लोग कई चीजें दान करते हैं। कोई कपड़ा, कोई खाना अगर आप कुछ दान नहीं कर पा रहे हैं या किसी को कुछ दे नहीं पा रहे हैं तो शिव कथा कहती है कि एक मुस्कान अपने चेहरे में तो ला सकते हैं। उन्हें एक मुस्कान भेंट कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब भगवान ने शरीर पूरा दिया है तो आधी भक्ति क्यों। आधी भक्ति सनातन धर्म की पहचान नहीं है। एक हाथ से राम-राम बोलना या एक हाथ से भगवान की भक्ति करना हमारे सनातन धर्म की पहचान नहीं है।
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