देवबंद स्थित उलूम की मजलिस-ए-शूरा (एग्जीक्यूटिव कमेटी) की शैक्षिक बैठक के प्रथम चरण में विभिन्न विभागाध्यक्षों ने अपनी अपनी रिपोर्ट पेश की। जिस पर शूरा सदस्यों ने विचार मंथन किया। उम्मीद है कि तीन दिवसीय बैठक में शूरा सदस्य कई अहम फैसले ले सकते हैं। आज बैठक का दूसरा दिन है।
बुधवार को दारुल उलूम के मेहमान खाने में आयोजित हुई बैठक में शिक्षा विभाग के प्रभारियों ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर सदस्यों ने गहनता से विचार मंथन किया। संभावना है कि आगामी चरणों की बैठक में शूरा सदस्य कर्मचारियों की नियुक्ति व उनकी पदोन्नति, वेतन में वृद्धि आदि मुद्दों पर विचार विमर्श किया जा सकता है।
बताया गया है कि शूरा सदस्य हाल ही में उठे गजवा-ए-हिंद विवाद पर भी कोई निर्णय ले सकते हैं। इसमें दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी, मौलाना अरशद मदनी, मौलाना महमूद मदनी, मौलाना अनवार, मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना इब्राहीम, मौलाना अब्दुल अलीम फारुकी, मौलाना महमूद राजस्थानी, मौलाना सैयद हबीब, मौलाना आकिल, मौलाना रहमतुल्ला कश्मीरी, मौलाना कलीमउल्लाह अलीगढ़ी और मुफ्ती शफीक आदि मौजूद रहे।
गजवा-ए-हिंद को लेकर विवादों में फंसे दारुल उलूम ने अपना लिखित जवाब डीएम और एसएसपी को भेज दिया था, जिसमें उन्होंने हदीस के हवाले से दिए गए जवाब का उल्लेख किया।
मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने बताया कि जांच के लिए पहुंचे एसडीएम देवबंद अंकुर वर्मा और सीओ अशोक सिसोदिया को मौखिक रूप से जवाब दे दिया था। इसके बाद डीएम और एसएसपी को भी एक पेज का लिखित जवाब भेज दिया गया। जो उर्दू और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में है।
इसमें बताया गया है कि संस्था ने वर्ष 2015 में वेबसाइट पर एक व्यक्ति द्वारा पूछे गए सवाल पर जो जवाब दिया था वो उनकी निजी राय नहीं थी, बल्कि जो कुछ भी हदीस में लिखा हुआ है, उसकी नकल की गई थी।
उससे वर्तमान का दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं है। इससे साथ ही मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने स्पष्ट कहा कि वह मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
बता दें कि दारुल उलूम की वेबसाइट पर गजवा-ए-हिंद को लेकर डाले गए वर्ष 2015 के एक फतवे को आधार बनाकर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने सहारनपुर डीएम और एसएसपी को पत्र भेजकर दारुल उलूम के खिलाफ जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया था।