बाद में फॉर्च्यूनर गाड़ी भी परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर खरीद ली। एक अन्य स्थान पर फ्लैट खरीदा। सोनीपत के मूरथल में पत्नी के साथ रहकर वहीं पर बैंक्वेट हॉल बनाना शुरू किया। इस बैंक्वेट हॉल का निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है।
आठ सालों में विजय ने करोड़ों का कारोबार खड़ा कर लिया। उसके अलग-अलग स्थानों पर बैंक अकाउंट हैं। एसटीएफ सीओ बृजेश सिंह का कहना है कि विजय तोमर के पास से जो दो मोबाइल फोन मिले हैं, 40-50 मोबाइल नंबर संदेह के घेरे में हैं, जिनकी जांच की जा रही है। 13 मोबाइल नंबर ऐसे हैं, जिन पर लगातार बात होती थी।
व्हॉट्सएप पर कॉलिंग
सीओ एसटीएफ ब्रजेश सिंह ने बताया कि मोबाइल की जांच के बाद एसटीएफ को पता चला कि विजय तोमर अभ्यर्थियों और अपने गिरोह के अन्य लोगों से व्हाट्सपर कॉलिंग करता था, जिससे कोई कॉल रिकार्ड न कर ले।
मोेबाइल में भी उत्तर कुंजी के फोटो और अन्य जानकारी भी एसटीएफ को मिली हैं। पकड़े गए एक आरोपी ने भी विजय तोमर का नाम पूछताछ में बताया था। विजय तोमर कस्टम का अधिकारी था उसको लेकर बारीकी से जांच की गई। उसके बाद गिरफ्तारी की गई।
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