मेरठ जिले से प्रयागराज तक बनाए जा रहे 594 किमी के गंगा एक्सप्रेसवे की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी कमान खुद संभाल ली है। उन्होंने यूपीडा को समीक्षा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। इसके बाद वेबसाइट पर 12 जिलों की रिपोर्ट को अपडेट कर 31 मई तक की ताजा स्थिति दिखाई गई है। मेरठ में अभी 101 हेक्टेयर भूमि क्रय की जानी है। यहां भूमि क्रय का प्रतिशत 43.87 है। 12 जिलों की प्रगति में मेरठ का नंबर 9वां है। मुख्यमंत्री जून तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया निपटाना चाहते हैं।
जिले के नौ गांवों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। कोरोना काल और पंचायत चुनाव के दौरान बैनामा प्रक्रिया रुक गई थी। अब तहसीलदार न्यायिक रामेश्वर प्रसाद की अगुवाई में बैनामे कराए जा रहे हैं। वह खुद लेखपाल के साथ गांवों में संपर्क कर रहे हैं। बुधवार को भी तीन हेक्टेयर के चार बैनामे किए गए। इसमें तीन शाफियाबाद लौटी के किसान और एक अटौला गांव का किसान शामिल रहा।
स्टांप और निबंधन शुल्क से जिला मालामाल
गंगा एक्सप्रेसवे के बैनामों के कारण जिला मालामाल हो जाएगा। स्टांप शुल्क के रूप में अभी तक 13 करोड़ 14 लाख 70 हजार 840 रुपये और निबंधन शुल्क के रूप में 2 करोड़ 19 लाख 30 हजार 321 रुपये जिले को मिले हैं। अभी 50 प्रतिशत से कम भूमि के बैनामे हुए हैं।
एक नजर में आंकड़े
योजना में शामिल गांव: 9
क्रय की जाने वाली भूमि: 181.3092 हेक्टेयर
क्रय के लिए बची जमीन: 101. 7669 हेक्टेयर
कुल किसान: 387
योजना में शामिल जिले: मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज
निशुल्क दी जाएगी ग्राम सभा की जमीन
शासन ने प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे में आने वाली ग्राम सभाओं के स्वामित्व या प्रबंधन वाली भूमि का निशुल्क पुनर्ग्रहण कर औद्योगिक विकास विभाग को देने के निर्देश दिए हैं। एसीएस, राजस्व रेणुका कुमार की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि यह व्यवस्था उन जिलों पर लागू होगी, जहां से गंगा एक्सप्रेसवे गुजर रहा है।