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Meerut News: पिता-पुत्र की हत्या में बर्खास्त सिपाही, पिता-भाई समेत चार दोषी करार

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- पैसों के विवाद में कंकरखेड़ा के भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन की गोली मारकर की थी हत्या
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- शामली जनपद में पुलिस की मौजूदगी में ले जाकर मारी थी गोली, 17 अगस्त को सजा पर फैसला
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना (शामली)। अप्रैल 2022 में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में अदालत ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया है। बर्खास्त यूपी पुलिस के सिपाही विक्रांत समेत चार लोगों को हत्या का दोषी करार दिया गया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय की अदालत 17 अगस्त को दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। यह मामला पैसों के विवाद से जुड़ा था जिसमें पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार छह अप्रैल 2022 को सुरेश देवी ने कांधला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उनके बेटे भूपेंद्र ने मखमूलपुर निवासी सिपाही विक्रांत से दो लाख रुपये उधार लिए थे। विक्रांत बाद में भूपेंद्र से 5.80 लाख रुपये वापस मांग रहा था।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अप्रैल 2022 को आरोपियों ने मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी भूपेंद्र, उसके बेटे अर्जुन और सुरेश देवी को अपने गांव बुलाया था। वहां उन्हें बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। इसके बाद सुरेश देवी को मेरठ से रुपये लाने के लिए भेज दिया गया। सुरेश देवी ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी थी।
पुलिस के पहुंचने के बाद भी सिपाही विक्रांत और उसके परिवार के लोग भूपेंद्र और अर्जुन को अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। उन्होंने थाने ले जाने का बहाना बनाया था। आरोप है कि भूपेंद्र और अर्जुन को थाने ले जाने के बजाय गांव सल्फा के जंगल में ले जाकर गोली मारकर हत्या दी गई। उनके शव वहीं डाल दिए गए थे। पुलिस ने बाद में दोनों के शव बरामद किए और पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भूपेंद्र और अर्जुन के सिर और सीने में गोली लगने की पुष्टि हुई थी।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सभी आरोपी तभी से मुजफ्फरनगर जेल में बंद हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से 14 गवाह पेश किए गए। इन गवाहों के बयानों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार राय ने विक्रांत, अर्जुन, वीरेंद्र और मोनू को हत्या का दोषी ठहराया। अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों पर विचार किया। यह फैसला दो साल से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद आया है। अदालत अब 17 अगस्त को चारों दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।
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मृतक भूपेंद्र की मां सुरेश देवी को मिले थे दो सुरक्षा गार्ड
कैराना। 6 अप्रैल 2022 को हुए पिता-पुत्र हत्याकांड की चश्मदीद गवाह सुरेश देवी को अभी भी पुलिस सुरक्षा मिली हुई है। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी भूपेंद्र और उसके बेटे अर्जुन की कांधला के सल्फा गांव में हत्या कर दी गई थी। भूपेंद्र की मां सुरेश देवी, पत्नी दुर्गेश और एक छोटी बेटी ही परिवार में बची थीं। सुरेश देवी इस मुकदमे की वादी हैं। वह घटना की मुख्य चश्मदीद गवाह भी हैं। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग ने कदम उठाए। उन्हें दो सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराए गए थे। ये दोनों सुरक्षा गार्ड आज भी उनकी सुरक्षा में तैनात हैं।

हत्यारा सिपाही विक्रांत आईबी के पूर्व निदेशक की सुरक्षा में था तैनात
कैराना (शामली)। मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन की हत्या के मामले में अदालत द्वारा चार आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद परिवार ने हत्यारों को फांसी की सजा देने की मांग की है। भूपेंद्र की मां सुरेश देवी ने बताया कि उनके इकलौते बेटे और पोते की बेरहमी से पिटाई कर गोली मारकर हत्या की गई थी। उन्होंने आरोपी विक्रांत और उसके भाई अर्जुन को फांसी देने की मांग दोहराई है।
सुरेश देवी ने बताया कि हत्यारों ने उनका घर उजाड़ दिया। वह खुद विधवा हैं और इस घटना के बाद उनकी पुत्रवधू दुर्गेश भी विधवा हो गई। घर में अब उनके अलावा पुत्रवधू और छोटी पोती ही बची हैं।
हत्याकांड के बाद परिवार में दहशत का माहौल था। करीब एक सप्ताह तक परिवार के सदस्य घर से बाहर नहीं निकले थे। उन्हें डर था कि कहीं परिवार के अन्य सदस्यों की भी हत्या न कर दी जाए। भूपेंद्र मूल रूप से सरधना के गांव छुर निवासी थे और अपने पिता बिजेंद्र के इकलौते बेटे थे। भूपेंद्र के 20 वर्षीय बेटे अर्जुन भी इकलौते थे। इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब सुरेश देवी और भूपेंद्र की 15 वर्षीय बेटी शगुन के सामने परिवार की जिम्मेदारी आ गई है।

-सिपाही विक्रांत की भूमिका
सिपाही विक्रांत आईबी के पूर्व निदेशक सैयद आसिफ इब्राहिम की सुरक्षा में तैनात था। विक्रांत के पास सर्विस पिस्टल थी और वह हत्याकांड से पहले ड्यूटी से गायब हो गया था। कांधला पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और उसके पास से सर्विस पिस्टल, हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद किए। बाद में शासन ने विक्रांत को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
-सुरेश देवी ने दर्ज कराया था मुकदमा
सुरेश देवी ने कांधला थाने में सिपाही विक्रांत, उसकी पत्नी शिवानी, मुदरेश, भाई अर्जुन, पिता वीरेंद्र और मोनू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस विक्रांत की पत्नी और मां की गिरफ्तारी के लिए उसके मकान पर पहुंची थी। गेट नहीं खोलने पर पुलिस ने जेसीबी से मकान का लोहे का गेट तोड़ दिया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई हत्याकांड के बाद हुई थी।
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-भूपेंद्र और अर्जुन को गाड़ी में डालकर ले जाया गया
6 अप्रैल 2022 को सुरेश देवी ने डायल-112 पर फोन कर बेटे और पोते को बंधक बनाकर पीटे जाने की सूचना दी थी। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही भूपेंद्र और अर्जुन को गाड़ी में डालकर ले जाया गया। उन्हें थाने ले जाने की बात कही गई थी। इसके बाद दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और शव सल्फा के जंगल में डाल दिए गए। इस मामले में ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सिपाही रजत कुमार और मोनू को निलंबित किया गया था।
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