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Meerut News: कूड़े की आग से फैली दुर्गंध, 10 लाख लोगों की सांसों पर बना संकट

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मेरठ। इसे साजिश कहें या फिर अनदेखी। लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ में आग की सूचना बृहस्पतिवार रात नौ बजे दी गई। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी तीन घंटे देरी से रात 12 बजे पहुंचे और तीन बजे तक आग पर काबू पाया जा सका। करीब साढ़े छह घंटे तक कचरा जलता रहा और उससे फैली दुर्गंध से करीब 10 लाख लोगों की सांसों पर संकट बना रहा। दूसरे दिन शुक्रवार को भी लोगों को सांस लेने में दिक्कत बनी रही। पार्षद ने निगम के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन दुर्गंध कम करने के लिए लोहियानगर, जाहिदपुर, हाजीपुर, अलीपुर, घोसीपुर सहित आसपास इलाके में पानी का छिड़काव तक नहीं कराया गया। इससे लोगों में आक्रोश है।
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लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ में बृहस्पतिवार रात 8:30 बजे आग की लपटें उठ रही थीं और लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इस पर पार्षद आशीष चौधरी अपने कुछ समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। पार्षद ने नगर आयुक्त व प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को फोन पर जानकारी दी और आग का वीडियो भी भेजा। इसके बावजूद अधिकारियों ने साध ली। रात में करीब 11 बजे अमर उजाला संवाददाता ने नगर आयुक्त को फोन पर कूड़े के पहाड़ में लगी आग की सूचना दी, तब जाकर नगर निगम की नींद टूटी। रात में 12 बजे फायर ब्रिगेड और नगर निगम के अधिकारी पहुंचे और तीन घंटे मशक्कत कर आग पर बुझाई गई। साढ़े छह घंटे में कई टन कचरा जलकर राख हो गया। कूड़ा जलाने के पीछे साजिश या फिर अनदेखी। इसकी जांच तक कराने की जहमत किसी अधिकारी ने नहीं उठाई। कूड़ा जल गया और 10 लाख लोगों की सांसों पर संकट मंडरा रहा है, बावजूद कोई चिंतित नहीं है। नगर निगम के इस रवैये को लेकर जाहिदपुर, लोहियानगर सहित कई गांवों के लोगों में आक्रोश भी है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कंपनी
लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ खत्म करने में नगर निगम नाकाम है। कूड़ा प्लांट संचालित करने वाली कंपनी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी है। नगर आयुक्त ने नोटिस भेजा था। कूड़ा निस्तारण न होना और निगम की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग रहा था। इसे लेकर ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और नगर आयुक्त सौरभ गंगवार सहित नगर निगम की टीम ने मुआयना किया था। इसमें कूड़ा प्लांट और निगम के कार्यों की पोल खुली थी। अब कूड़ा जल गया और सुबूत तक मिट गए हैं। कूड़ा संचालित करने वाली कंपनी ने कितने कूड़े की छंटनी की है, इसके प्रमाण भी नहीं मिलेंगे।
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