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हत्या के 24 घंटेः बली में सन्नाटा

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07पीजीएच1बी - मेरठ के गांव बली निवासी मृतक अनित के मासूम तीन बच्चे। - फोटो : PARIKESHGARH
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मवाना/मेरठ। जिला पंचायत वार्ड 34 के उपचुनाव में विजय धामा ने शनिवार शाम पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में ऐसा खूनी खेल खेला कि कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। बली गांव के प्रधान कालूराम के बेटे अनित गुर्जर की हत्या के बाद से बली गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। प्रधान के घर रविवार दिन भर संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा। महिलाओं का रुदन गांव के सन्नाटे को चीर रहा था। बली गांव से करीब 700 मीटर की दूरी पर ही हत्यारोपी विजय धामा का गांव है। दोनों ही गांव गुर्जर बाहुल्य बिरादरी के हैं। रामनगर में खौफ का माहौल देखा गया।
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बली गांव में प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए उपचुनाव के मतदान केंद्र की दूरी गांव से करीब 400 मीटर की है। गांव से लेकर प्राथमिक विद्यालय तक सन्नाटा पसरा था। बली में तनावपूर्ण शांति देखी गई। गांव के माहौल को देखते हुए गांव के अंदर कोई फोर्स नहीं लगाया गया। लेकिन गांव के रास्ते पर आरआरएफ और थानों की पुलिस फोर्स लगाई गई। भरी धूप में पीएसी और पुलिस के जवान पेड़ की छांव में थे। अंदर गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था। प्रधान कालूराम के घर सांत्वना देने के लिए नेताओं व अन्य लोगों आवागमन भी इस सन्नाटे को तोड़ रहा था। कुछ लोग अपने घरों की गैलरी में थे। एक ही दर्द था कि घटना दुखद हुई। दोस्ती में विजय धामा ने घर को तबाह कर दिया।
वहीं गांव रामनगर के अंदर अघोषित कर्फ्यू से हालात थे। कोई भी व्यक्ति सड़कों पर नजर नहीं आ रहा था। गांव में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। इस गांव में पीएसी की जिप्सी निकलती हुई दिखाई दी, जबकि इस गांव से ही बली गांव का रास्ता जाता है। आरोपी विजय धामा के घर बीती रात दबिश के दौरान सामान बिखरा पड़ा रहा। घर में न तो कोई पुरुष मिला और न कोई महिला। घर सुनसान पडा है। गांव में कोई भी कुछ बोलने को तैयार नही है। गांव के बाहर राकेश गुर्जर ने यही बताया कि शनिवार रात से गांव में दहशत है। इतनी पुलिस फोर्स कभी नहीं देखी, जितनी शनिवार रात को विजय धामा के घर दबिश देने गई थी। लोग घरों से नहीं निकले। कहीं पुलिस किसी को उठा न ले। अनित की हत्या होने पर गांव बली ही नहीं आसपास के कई गांवों में शोक व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि अनित गांव के सभी समाज के लोगों का सम्मान करता था। उसकी हत्या होने पर ग्रामीणों ने विजय धामा के खिलाफ आक्रोश है। पुलिस को जल्द ही जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजना चाहिए। अनित के पिता और गांव के प्रधान कालूराम की अच्छी छवि है।
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घरों में केवल महिलाएं
भाजपा समर्थित प्रत्याशी विजय धामा द्वारा अपनी ही एजेंट अनित को गोली मार कर हत्या करने के बाद एसएसपी और एसपी देहात ने रामनगर गांव में ताबड़तोड़ दबिश दी। जिसके चलते ग्रामीण पुलिस के डर से अपने घरों को छोड़ कर फरार हो गए। गांव में महिलाएं ही मौजूद मिलीं।
सांत्वना देने वालों का लगा रहा आना-जाना
रविवार को पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति, विधायक दिनेश खटीक, पूर्व विधायक गोपाल काली, रालोद नेता नरेंद्र खजूरी, युद्धवीर सिंह, मदन गुर्जर, चीकू बढ़ला, राजीव इंद्रराज, इंतजार अली, सपा नेता अतुल प्रधान, अशोक पोसवाल, रोहताश पहलवान, केपी खुंटी, प्रताप गुर्जर, अजीत चौधरी, सुनील प्रधान, ऋषि प्रधान, भाजपा नेता सोनू त्यागी, देवेंद्र त्यागी, दीपक प्रधान, केपी प्रधान, कुंवरपाल सिंह, मेघराज यादव, योगेश प्रधान आदि लोगों ने प्रधान कालूराम के घर पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंद्र सिंह अपने पिता मुखिया गुर्जर, भाजपा नेता लवी गुर्जर आदि भी पहुंचे। कुलविंद्र सिंह के सामने प्रधान कालूराम बिलख पड़े। कहा कि मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी दिन देखने को मिलेगा। मेरा तो सब कुछ चला गया। आसपास के गांवों के प्रधान और अन्य लोग भी पहुंचे।
बच्चों ने पूछा, पापा कब आएंगे
अनित के दो पुत्री एक पुत्र है। सुबह से शाम तक अनित के घर नही पहुंचने पर 7 साल की पुत्री मनु, 4 साल की अन्नू और 2 साल के पुत्र आरव घर के आंगन में भीड़ को देखकर अपनी दादी सुरेश, दादा कालूराम से बार-बार पूछ रहे थे कि पापा कब आएंगे। बच्चों की यह बात सुनकर दादा, दादी उन्हें गले से लगाकर फूट फूटकर रोने लगे। वहां मौजूद सभी लोग उन्हें सांत्वना देते रहे।
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