नगर निगम में खंगाली जानें लगीं जर्जर भवनों की फाइल
मेरठ। जर्जर भवनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी से मुंह फेरकर बैठे नगर निगम कर्मियों ने जर्जर भवनों के स्वामियों को भेजे गए नोटिसों की फाइल खंगालनी शुरू कर दी है। निगम अधिकारियों का कहना है कि फाइल में देेखकर ही पता लग पाएगा कि नोटिस दिए जाने के बाद जर्जर भवन की स्थित वर्तमान में कैसी है। यह भी पता चल सकेगा कि संबंधित कर्मियों ने इस पर कोई कारवाई की है या नहीं।
शहर में मानसून से पहले जर्जर भवनों का सर्वे कराने का जिम्मा नगर निगम का है लेकिन निगम ने आज तक शहर में जर्जर भवनों का सर्वे ही नहीं कराया है। दूसरी ओर शहर में सैकड़ों जर्जर भवन लोगों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसे मामलों में शिकायत के बाद नोटिस के नाम पर लेन-देन कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
अमर उजाला की पड़ताल के बाद निगम का निर्माण विभाग नींद से जागा। कई साल से धूल में पड़ी नोटिस की फाइलें खंगाली जाने लगीं। बुधवार को संबंधित पटल बाबू ने कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नौगजा, कैलाशपुरी स्थित कुमार आश्रम, शाहपीर गेट के मोहल्ला खटिकान, सुभाष बाजार और खुनी पुल स्थित मंगल निवास की फाइल खोज निकाली। इन सभी जर्जर भवनों को निगम ने 2015 से 2017 के बीच नोटिस भेजे थे लेकिन नोटिस के बाद क्या कार्रवाई हुई, ये फाइल में नहीं है। विभाग का कहना है कि 2017 के बाद न तो कोई शिकायत आई ओर न ही कोई नोटिस भेजा गया।
पता की जाएगी वर्तमान स्थिति
नगर निगम के मुख्य अभियंता (निर्माण) यशवंत कुमार का कहना है कि पहले नोटिस दिए गए भवन स्वामियों की फाइल निकाल कर उन पर हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थित में भवन की हालत जानने के निर्देश दिए हैं।