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Meerut News: अरुण गोविल का इंटरव्यू

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अभिनेता से नेता बने अरुण गोविल अब मेरठ के सांसद बन चुके हैं। सांसद बनने के बाद से वह लगातार मेरठ में हैं। वह यहां के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश कर रहे हैं। यहां की जो जरूरतें हैं उन्हें किस तरह से पूरा किया जाए और जो विकास के कार्य चल रहे हैं उन्हें किस तरह से रफ्तार दी जाए। अरुण गोविल शुक्रवार को अमर उजाला के कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने अमर उजाला के संपादक नितिन यादव से खास बात की... पेश है बातचीत के कुछ अंश।
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सवाल: सियासत कितनी रास आ रही है?
जवाब: सियासत मेरे लिए नई बात है। सामान्य तौर पर माना जाता है या मैं मानता हूं कि सियासत में किसी के साथ उठापटक कर दो, किसी को गिरा दो, किसी को उठा दो। मैं इस सियासत का हिस्सा नहीं हूं। मेरे हिसाब से कुछ काम करने के लिए मुझे नहीं लगता कि मुझे उस सियासत की जरूरत नहीं पड़ेगी। मैं आसान शब्दों में यही कहना चाहता हूं कि यहां के लिए जो हो सकता है वह हम पूरी क्षमता के साथ करेंगे। जो हम चाहते हैं उसके अनुसार काम करेंगे। हर जगह की समस्या अलग होती है। कुछ स्थानीय समस्या होती है कुछ दूसरी समस्याएं होती हैं। हम शहर के विकास और उसे और खूबसूरत बनाने के लिए काम करेंगे।

सवाल- मेरठ में आप पढ़े लिखे, बड़े हुए। आपको कितना बदला हुआ नजर आता है यह शहर?
जवाब-अगर कोई बताए नहीं तो इस शहर को पहचानना मुश्किल है क्योंकि तब के मेरठ और अब के मेरठ में बहुत बदलाव आ चुका है। मैं खुद इसे नहीं पहचान पाता हूं। यहां हर क्षेत्र में विकास हुआ है। कनेक्टिविटी बढ़ी है, रैपिड ट्रेन और मेट्रो ट्रेन आ रही है। एक्सप्रेस वे बन रहे हैं। मेरठ अब स्पोर्ट्स का हब हो गया है। शहर बहुत बदल गया है।
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सवाल: आप मेरठ में क्या विशेष करेंगे?
जवाब: मेरठ में एयरपोर्ट बन रहा है, उसके काम को पूरा करना है। ज्वेलर्स की कुछ समस्याएं हैं, उनका निराकरण करना है। शहर में कूड़े की समस्या है। कई स्थानों पर तो कूड़े के पहाड़ बन गए हैं। उनका निस्तारण किस तरह किया जाए इस पर काम करेंगे। शहर की सड़कों की हालत खराब है, उसे ठीक कराया जाएगा। शहर के विकास के काम के लिए जो भी कोशिशें हुई हैं, हम उन्हें आगे बढ़ाएंगे। शहर में पेड़ बहुत कम दिखते हैं। जिसकी वजह से यहां को एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब है। वृहद पैमाने पर वृक्षारोपण की जरूरत है।

सवाल: यहां के कल्चर के बारे में आप क्या सोचते हैं?
जवाब: यहां लोग हर बात को व्यक्तिगत ले लेते हैं। यह अंतर है यहां का। यहां के लोगों के साथ घुलने-मिलने के लिए प्रशिक्षण लेना होगा। मसलन आज सुबह योग के कार्यक्रम में गए थे। महानगर के अध्यक्ष भी थे वहां। पास में ही एक व्यक्ति थे जो फोटो ले रहे थे। अध्यक्ष जी ने उस व्यक्ति को बुलाया आइये आप भी फोटो खिंचवा लीजिए। वह व्यक्ति वहां आ गए और फोटो खिंचवाने के बाद बोले...भाई फोट्टो को जरूरत तो नेताओं को पड़े है, हमें तो ना पड़ती... यह भी मेरठ का एक कल्चर है।

सवाल: मेरठ के सांसद अरुण गोविल मुम्बई में मिलेंगे या मेरठ में?
जवाब: मैं मेरठ में ही रहूंगा। क्योंकि मैंने फैसला किया है कि यहां के लिए काम करना है। इसलिए रहना जरूरी है। यह काम ऐेसा नहीं है जो वर्क फ्राम होम किया जा सके। यह आनलाइन वाला काम नहीं है।

सवाल: चुनाव के दौरान आपने अपनी पत्नी को क्षत्रिय बताया था? क्या यह बयान ठाकुरों की नाराजगी दूर करने के लिए था या सियासी बयान था?
जवाब-इसे अगर आप सियासी बयान भी कहें तो यह कोई खराब बात नहीं थी? यह तो सच था जो हमने कहा। मेरी पत्नी इसी प्रदेश की हैं। उनका मिजाज ठाकुरों वाला ही है। जो मैंने कहा, वह एक सच्चाई थी। अगर कोई पक्ष नाराज है तो उसकी नाराजगी मेरे बयान से दूर होती है तो ठीक है।

सवाल: कैंपेन के दौरान आपको ऐसा लगा कि लोग भाजपा के उम्मीदवार से न मिलकर भगवान राम की प्रतिमूर्ति से मिल रहे हों?
जवाब: जी हां। ज्यादातर मौके पर यही लगा कि लोग भगवान राम की प्रतिमूर्ति के तौर पर मुझसे मिल रहे हैं। आज मैं यह बात कह सकता हूं कि महिलाएं ही नहीं पुरुष कम इमोशनल नहीं थे। वह भी अगर हमें माला पहना सके तो वह रोने लगते थे। अगर सिर्फ अरुण गोविल के तौर पर चुनाव लड़ रहे होते तो हार जीत का अंतर कुछ और भी हो सकता था।

सवाल: क्या राजनीति में आने के बारे में सोचा था?
जवाब: शायद नहीं, लेकिन जब अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी उस वक्त जरूर मेरे मन में विचार आया था कि सक्रिय तरीके सेे समाज सेवा का काम किया जाए। हालांकि मैंने किसी से जिक्र भी नहीं किया। जब चुनाव करीब आया तो कुछ लोगों का फोन आया और बताया गया कि मेरा नाम चल रहा है। फिर एक दिन पार्टी की ओर से फोन आया और मुझे बताया गया। मैंने समाजसेवा के भाव से हामी भरी। मैं सीधे-सीधे सेवा कार्य करना चाहूंगा।

सवाल: अयोध्या की हार को लेकर तरह-तरह के कमेंट देखने को मिल रहे हैं। आपको भी लोग जोड़ रहे थे, इसे आपने भी महसूस किया?
जवाब: जी हां। बिल्कुल महसूस किया। लोगों ने मुझसे यहां तक कहा कि क्योंकि राम अयोध्या से मेरठ आ गए थे, इसलिए अयोध्या में भाजपा हार गई, लेकिन मेरा मानना है कि अयोध्या की हार के और भी कारण रहे होंगे।

सवाल: चुनाव खत्म होने के बाद आपने ट्वीट किया? वह किसके बारे में था?
जवाब: पिछले तीन साल से मैं ट्विटर पर एक विचार पोस्ट करता रहा हूं। वह ट्वीट भी उसी का हिस्सा था। निश्चित रूप से कड़ा ट्वीट था। उसका असर यह हुआ कि लोगों को अपने गिरेबान में झांकने की नौबत आ गई। हालांकि बाद में पार्टी के कहने पर उसे डिलीट कर दिया और उसके बाद ट्विटर पर अपने विचार व्यक्त करना बंद कर दिया।

सवाल: इस शहर से जुड़ी हुई कुछ यादें जिसे आप साझा करना चाहें?
जवाब: मुझे घंटाघर के पास का अपना घर याद है। जीआईसी याद है। पिछले दिनों मैं वहां गया, लेकिन कॉमन हाल में लंबी-लंबी घासें देख कर दुख हुआ। वाटर लागिंग हो जाती थी। जीआईसी में भी साल में एक अपराध जरूर हो जाता था।

सवाल: संविधान बदलने को लेकर आपने जो बयान दिया था, क्या उस पर अब भी कायम हैं?
जवाब: देखिए मैंने जो उस दिन कहा था वही आज भी कह रहा हूं। मैंने संविधान बदलने की बात कभी नहीं कही। संविधान में समय-समय पर संशोधन होता रहा है। यह कोई नई बात नहीं थी। संविधान बदलना एक बहुत बड़ा बयान होता, जो मैंने नहीं दिया। मैं अपने बयान पर आज भी कायम हूं।
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सवाल: सांसद बनने के बाद अरुण गोविल किस फिल्म में नजर आएंगे? छोटे पर्दे पर नजर आएंगे या बड़े पर्दे पर?
जवाब: मैंने दो तीन फिल्में की हैं, जो अभी रिलीज नहीं हुई हैं। वह किसी पर्दे पर भी हो सकती है या किसी ओटीटी पर होगी।
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