- 80 करोड़ की लागत से बनेगा प्लांट, महापौर और गेल कंपनी के प्रतिनिधि ने किया मुआयना
- कूड़े से सीमेंट की बड़ी ईट बनेगी, शहर की डेयरी से निकलने वाला गोबर भी लेगी गेल कंपनी
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महानगर का 1200 मीट्रिक टन कूड़ा और नालों में बहाने वाले गोबर का निस्तारण करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। किला परीक्षितगढ़ रोड स्थित गांवड़ी में 80 करोड़ रुपये की लागत से गेल कंपनी 15 एकड़ में प्लांट लगाकर रोजाना 800 मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण करेगी। डेयरी से निकलने वाला गोबर भी गेल कंपनी लेगी। इसको लेकर महापौर और गेल कंपनी के प्रतिनिधि ने गांवड़ी में नगर निगम की खाली पड़ी जमीन का मुआयना किया। निगम के साथ अनुबंध करके फरवरी तक इस प्लांट को लगाने की बात कही गई है।
सफाई और कूड़ा निस्तारण करने में नगर निगम फेल साबित हो रहा है। पांच दिन पहले गार्बेज फ्री सिटी ने मेरठ नगर निगम को सिर्फ एक स्टार दिया है। इसे लेकर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने दो दिन पहले नगर विकास मंत्री एके शर्मा से मुलाकात की। महापौर ने गांवड़ी, मंगतपुरम और लोहियानगर में कूड़े का पहाड़ लगने की बातकर वैज्ञानिक पद्धति द्वारा कूड़ा निस्तारण न होने की जानकारी दी। जिस पर नगर विकास मंत्री ने गेल गैस कंपनी या फिर ओएनजीएस द्वारा कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने की बात कही थी। बुधवार को गेल गैस कंपनी के प्रतिनिधि संजय गुप्ता मेरठ पहुंचे और महापौर से मुलाकात की। उसके बाद महापौर के साथ संजय गुप्ता ने गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण किया। बताया गया कि गांवड़ी में 15 एकड़ जमीन में गेल कंपनी कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा देगी। खाद्य और अन्य मेटेरियल अलग करेगी। रोड़ी और अन्य मेटेरियल से सीमेंट की बड़ी-बड़ी ईंट बनाएगी, जिसको आजकल बड़ी इमारतों में इस्तेमाल किया जा रहा है। कूड़े से निकलने वाला खाद्य और डेयरी का गोबर भी कंपनी लेगी। दो शिफ्ट में प्लांट पर 400-400 मीट्रिक टन कूड़ा लेने की बात कही, यानि रोजाना 800 मीट्रिक टन का निस्तारण किया जाएगा। गेल कंपनी के प्रतिनिधि ने जमीन देखी और फिर जल्द ही दस्तावेज तैयार करके प्लांट लगाने की बात कही।
बराबर में दूसरा प्लांट भी चालू हो सकता
महापौर ने बताया कि गांवड़ी में निगम की करीब 45 एकड़ जमीन है, जिसमें से 15 एकड़ जमीन करीब 6 साल पहले कूड़ा निस्तारण करने के लिए आर्गेनिक रिसाइकिलिंग कंपनी को 25 साल के लिए अनुबंध पर दी थी। जिसका मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट से जल्द निस्तारण होने की उम्मीद है। गेल कंपनी के अलावा गांवड़ी में आर्गेनिक रिसाइकिलिंग कंपनी भी कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा सकती है। महानगर से रोजाना 1200 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। कैंट के कई मोहल्ले भी निगम में शामिल होने की तैयारी चल रही है। आर्गेनिक कंपनी के साथ उनको 800 मीट्रिक टन कूड़ा देने का अनुबंध है। महानगर से दोनों प्लांट को कूड़ा पर्याप्त मिल जाएगा।
बीमारी दूर होगी और भूगर्भ भी सुधरेगा
गांवड़ी, मंगतपुरम और लोहियानगर में कूड़े के पहाड़ लगे हैं। 50 हजार की आबादी कूड़े के पहाड़ से प्रभावित है। एनजीटी भी कई बार निगम के अधिकारियों को चेतावनी दे चुका है। लोग बीमार हो रहे हैं और भूगर्भ दूषित हो रहा है। नगर निगम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। वैज्ञानिक पद्धति से दोनों प्लांटों पर कूड़ा निस्तारण होगा तो शहर की गंदगी साफ होगी। डेयरी का गोबर भी नालों में नहीं बहेगा। निरीक्षण के दौरान महापौर के साथ प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह, सूरजंकुड डिपो प्रभारी और निगम के अधिकारी मौजूद रहे।