मेरठ/खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे के विरोध में किसानों ने तीखा रुख अपना लिया है। किसानों ने जिला प्रशासन के खिलाफ सोमवार को खरखौदा के छतरी गांव मोड पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। चेतावनी दी कि प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी हठधर्मिता बंद नहीं की तो कमिश्नरी का घेराव करेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। बोले कि किसी भी हालत में जमीन नहीं देंगे।
खरखौदा, बिजौली के किसानों से करीब 200 हेक्टेयर जमीन लेकर यूपीडा ने गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारा विकसित करने का कार्य शुरू कर दिया। यूपीडा ने गलियारे के लिए जिला प्रशासन से 300 हेक्टेयर जमीन की डिमांड की है। उक्त 300 हेक्टेयर जमीन खड़खड़ी, गोविंदपुर, छतरी और खरखौदा माजरा की जमीन चिह्नित की गई है। जमीन का अधिग्रहण के लिए लेखपाल, कानूनगो व तहसीलदार ने तीन माह से किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। किसानों ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रशासन उनके साथ जबर्दस्ती करेगा तो वह आंदोलन करेंगे।
सोमवार को किसानों की छतरी गांव में पंचायत हुई और फिर छतरी गांव के मोड पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। किसानों ने कहा कि जमीन से उनका परिवार चलता है। वे कैसे जमीन दें। शासन इस विषय पर कोई निस्तारण न होने पर किसानों ने जल्द ही एक बड़ी पंचायत करने का एलान भी किया है। किसान समिति के अध्यक्ष मामचंद नगर ने बताया कि चारों गांव के किसान अपनी उपजाऊ जमीन देना नहीं चाहते हैं।
राकेश टिकैत को बुलाएंगे
किसान रामचंद्र ने बताया कि यदि हमारी समस्या का समाधान जल्द नहीं होता है तो जल्द ही भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को भी बुलाएंगे। डीएम कार्यालय और कमिश्नरी पर 100-125 ट्रैक्टर के साथ कमिश्नरी का घेराव करेंगे। धरने पर सदर तहसीलदार शैलेंद्र कुमार सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास कियाए लेकिन किसानों ने एक न सुनी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शौराज त्यागी ने की। कई महिला किसान सहित किसान मोर्चा नोएडा के अध्यक्ष सुनील फौजी, उपाध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, राजकुमार, मुकेश फौजी, अशोक खड़खड़ी, देवेंद्र शर्मा, महेश त्यागी, इंद्रमुनि त्यागी व संजय गुर्जर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
बार-बार बैठक, नतीजा शून्य रहा
औद्योगिक गलियारे के लिए 300 एकड़ जमीन के लिए जिला प्रशासन को मशक्कत करनी पड़ रही है। सर्किल रेट से 4 गुना कीमत ज्यादा पैसा देने पर भी किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों के साथ पांच बार बैठक की, नतीजा शून्य है। बताया गया कि खरखौदा और बिजौली के किसानों की करीब 200 एकड़ जमीन पहले ही औद्योगिक गलियारा विकसित करने के लिए दे दी है। खरखौदा और बिजौली के सर्किल रेट ज्यादा है, जिसके चलते प्रशासन ने चार गुना ज्यादा पैसा देकर उनको राजी कर लिया था। यूपीडा द्वारा औद्योगिक गलियारा का विस्तार करने के लिए अब 300 एकड़ जमीन की डिमांड की है, उक्त चारों गांव का सर्किल रेट कम है। किसान खरखौदा और बिजौली के किसानों जितना मुआवजा मांग रहे हैं, जिसको प्रशासन देने से इनकार कर रहा है।