मवाना। गांव नीमका में गन्ना विकास परिषद के तत्वावधान में बसंत कालीन गन्ना बुवाई हेतू विशेष प्रचार प्रसार अभियान के अंतर्गत सामूहिक सभा/कृषक गोष्ठी/गन्ना प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
अध्यक्षता मुख्तियार सिंह व संचालन देवेंद्र कुमार गन्ना पर्यवेक्षक ने किया। राजबीर सिंह प्रभारी गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि फसल उत्पादन में लगातार कीट नाशकों व अन्य जहरीले रसायनों के प्रयोग से भूमि व मानव स्वास्थ्य खराब हो रहे हैं। यह जहरीले रसायन फसल के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचकर विभिन्न बीमारी को पैदा करते हैं तथा भूमि में उपस्थित सूक्ष्म जीवों की संख्या व सक्रियता को नष्ट कर कृषि भूमि खराब कर रहे हैं, इन हानिकारक रसायनों के स्थान पर जैव उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। यह जैव उर्वरक गन्ना समिति के खाद गोदामों पर 50 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध है।
बनारसी गन्ना पर्यवेक्षक ने बताया कि भूमि से सिंचाई के रूप में जल का लगातार दोहन होने से भू-जल स्तर बहुत तेजी से गिरना भविष्य के लिए चिंता का विषय बन गया है। सामान्य सिंचाई विधि के स्थान पर ड्रॉप इरिगेशन (टपक सिंचाई) अपनाने से कम सिंचाई जल से अधिक भू-भाग की सिंचाई की जा सकती है। इस विधि में पानी पौधों की जड़ में देने से खरपतवार नहीं उगते, असमतल खेती की सिंचाई आसान से की जा सकती है। सिंचाई जल के साथ खाद व दवा आदि का प्रयोग अधिक दक्षता से किया जा सकता है। टपक सिंचाई संयंत्र स्थापित कराने पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषक को लागत का 90 प्रतिशत व सामान्य जाति को 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। कृषि विभाग के पोर्टल पर आधार कार्ड, बैंक पास बुक, फर्द फोटो से पंजीकरण किया जा सकता है।
सुशील कुमार गन्ना पर्यवेक्षक ने बताया कि परिक्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा सिंगल बढ़ विधि से नई प्रजातियों का कीट व रोग से मुक्त गन्ना बीज तैयार किया जा रहा है। जिसकी कीमत 2 रुपये 60 पैसे प्रति पौधा है। यह पौधे पछेती गन्ना बुवाई व पेड़ी फसल में खाली स्थान भरने में बहुत महत्वपूर्ण है। इन समूहों से तैयार पौध लेकर हेक्टेयर में दलहनी व तिलहनी फसल लगाने पर 8000 रुपये प्रति हेक्टेयर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत अनुदान दिया जाता है। कार्यक्रम के अंत में गन्ना प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस दौरान जंगीर सिंह, सूबे सिंह, सोनी, ओमकार, अंकित, मूखराम शर्मा, राजेंद्र, सूकरमपाल आदि कृषकों को पुरस्कृत किया गया। संवाद