किसानों को नहीं मिला आलू की चिपसोना एफ-1 प्रजाति का बीज
माछरा। उद्यान विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर आलू का उन्नतिशील प्रजाति चिपसोना(एफ-1) का बीज दिया जाना था। आवेदन पत्र लेने के बाद बीज की कीमत जमा करा ली गई, परंतु बीज उपलब्ध नहीं कराया गया और रुपया वापस किया गया। किसानों को खुले बाजार से आलू का बीज महंगी दर पर खरीदकर बुवाई करनी पड़ रही है।
प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से आलू पर अनुदान घोषित किया था। चिपसोना(एफ-1) के आलू की कीमत 1740 रुपये प्रति कुंतल अनुदान के बाद तय की गई थी। किसानों ने आलू का बीज लेने को उद्यान विभाग में ब्लॉक वार आवेदन किए थे, परंतु किसानोें की उपेक्षा करते हुए बीज नहीं दिया गया। आरोप है कि अपने चहेते किसानों व दलालों के माध्यम से अधिक पैसा लेकर कुछ बीज बांटा गया।
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष राकेश त्यागी, ताराचंद त्यागी, सुभाष त्यागी, मनोज आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने माछरा ब्लॉक की तरफ से चिपसोना आलू का बीज उद्यान विभाग मेरठ से लेने के लिए आवेदन किया था। उसी के तहत उनसे आलू के बीज का पैसा भी मोदीपुरम कोल्ड स्टोरेज पर जमा कराया गया। जब वह बीज लेने पहुंचे तो जिला उद्यान अधिकारी ने चिपसोना बीज नहीं होने की बात कही।
भाकिसं के जिलाध्यक्ष का आरोप है कि उद्यान विभाग के अधिकारियों ने दलालों के माध्यम से सरकारी रेट से अधिक पैसा वसूलकर चिपसोना आलू का बीज वितरित किया है। इसकी शिकायत लखनऊ आलू विभाग में भी की गई है।
जिले को जो चिपसोना बीज मिला था, उसमें से उद्यान विभाग के सरकारी फार्म में आलू की बुवाई कर दी गई, जिससे बीज कम पड़ गया। दोबारा से बीज मांग की गई। बीज नहीं मिला, इसलिए किसान इस प्रजाति के बीज से वंचित रह गए। कम मात्रा में बीज लेने के लिए किसान तैयार नहीं थे।
- भूपेंद्र सिंह, कोल्ड स्टोरेज इंचार्ज, उद्यान विभाग
मेरठ जनपद को ख्याति गरिमा, सूर्या, 3797, चिपसोना एफ-1 प्रजाति का बीज मिला था। उसमें चिपसोना का बीज केवल 150 कुंतल था, जिसकी कुछ सरकारी फार्म में भी बुवाई की गई। बाकी चिपसोना बीज का वितरण किसानों को किया गया। दूसरी प्रजाति का बीज लेने से किसानों ने इंकार कर दिया। किसानों का पैसा वापस किया गया है। दलालों द्वारा बीज का वितरण कराने का आरोप निराधार है।
- रामवीर सिंह राठौर, जिला उद्यान अधिकारी