हाईकोर्ट में हलफनामा देने के बाद भी गन्ना विभाग चीनी मिलों से ब्याज नहीं दिला पा रहा है। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि चीनी मिल अफसरों की मनमानी व प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के चलते गन्ने की दुर्गति हो गई है। किसान अब तक यह नहीं कह पाता कि वह गन्ना बेचने जा रहा है।
किसान कहता है कि वह गन्ना मिल में डालने जा रहा है। जब तक किसान गन्ना बेचना सीख लेगा उसी दिन मिल अफसर किसान की ताकत समझ जाएंगे। जिस दिन किसानों ने चीनी मिलों से विलंब भुगतान पर ब्याज ले लिया, चीनी मिल उसी दिन से किसानों को समय से भुगतान देना शुरू कर देंगी।
इस बीच एसडीएम बृजेश कुमार व डीसीओ यशपाल सिंह चीनी मिल के अफसरों के साथ किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने पांच करोड़ का पिछले साल का बकाया भुगतान कराने की बात कही। इसमे बिलाई चीनी मिल का डेढ़ करोड़ का भुगतान था। इस पर किसान भड़क गए।
किसानों ने कहा कि बिलाई चीनी मिल के भुगतान को इस साल का न मानकर ब्याज माना जाए। अगर मिल अधिकारी कह देंगे कि डेढ़ करोड़ रुपये ब्याज के हैं तो वे इतने कम भुगतान पर भी आंदोलन खत्म कर देंगे। यह सुनकर सभी मिल अफसरों को सांप सूंघ गया। अधिकारी व अफसर वापस लौट गए।
इसके बाद भी दो बार अधिकारियों ने किसानों के बीच जाकर वार्ता की, लेकिन किसानों ने उन्हें वापस लौटा दिया। चौथी बार में प्रशासन ने 40 करोड़ का भुगतान दिलाने की बात कही। गन्ना आयुक्त से बात करने के बाद ब्याज का भुगतान 20 अगस्त तक कराने को कहा। अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने धरना समाप्त किया। वक्ताओं ने कहा कि अगर प्रशासन अपने वादे से मुकरा तो एक सितंबर से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।