इसके बाद इस सीमेंट को पैक कर बाजार में उतार दिया जाता था। पुरानी सीमेंट की इस्तेमाल होने के कारण आम व्यक्ति इस सीमेंट में फर्क भी नहीं कर पाता। सीमेंट विक्रेता भी मोटे मुनाफे की चाह में नकली सीमेंट बेचकर इनके गुनाह में शामिल हो जाता था।
हर कट्टे पर कमाते थे दो सौ रुपये मुनाफा
नकली सीमेंट बना रहे आरोपी रोजाना लाखों के वारे-न्यारे कर रहे थे। दरअसल, जांच में सामने आया कि पुराने सीमेंट को पीसकर नया बनाने में प्रति कट्टा लागत 140 रुपये तक आती थी। तैयार होने के बाद यह कट्टा 335-340 रुपये में सीमेंट विक्रेता को सप्लाई किया जाता था, जिसके बाद इसे बाजार दाम पर असली सीमेंट के कट्टों में मिलाकर बेचा जाता था।
इन्होंने कहा
भवन निर्माण विशेषज्ञ मयंक कुमार का कहना है कि सीमेंट एक बार जम जाने के बाद उसकी ताकत पूरी तरह खत्म हो जाती है। उसे पीसकर फिर से नया बनाने से उसकी मजबूती नहीं लौटती। ऐसे में नकली सीमेंट के इस्तेमाल से बनी कोई भी इमारत मजबूत नहीं हो पाती और वह कभी भी भरभराकर ढह सकती है।