सुपर इंपोज प्लान में यह भेजा गया
इस प्लान में सरकार के पास कितनी जमीन उपलब्ध है। इसके अलावा कितनी जमीन वन विभाग, एमडीए व अन्य सरकारी विभागों की है तथा किसानों की कितनी जमीन लेने की जरूरत होगी। इसकी रिपोर्ट तैयार की गई थी। शासन से रिपोर्ट को अनुमति मिलने के बाद एएआई को भेजी गई थी, जिससे जमीन की उपलब्धता पर पूरा ड्राफ्ट तैयार हो सके।
2600 मीटर लंबे रनवे की जरूरत
अभी मौके पर हवाई पट्टी 120 मीटर चौड़ी है। इसे 200 मीटर चौड़ा और 2600 मीटर लंबा बनाना होगा। जो सुपर इंपोज प्लान तैयार किया गया है उसमें यही रिपोर्ट दी गई है कि एमडीए, वन विभाग की जमीनों से यह काम पूरा हो सकता है। वहीं, कुछ जमीन किसानों से ली जा सकती है।
अभी तक यह प्रक्रिया हो चुकी, लेकिन अटका है मामला
रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत मेरठ में हवाई उड़ान की संभावनाओं में तेजी आई थी। एएआई ने मेरठ सहित देश के 134 हवाई रूटों पर उड़ान के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। जिसमें मेरठ-लखनऊ-इलाहाबाद के लिए गुरुग्राम की एयरलाइंस कंपनी जूम एयर ने सिंगल बोली लगाई थी।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बिड को स्वीकार कर जूम एयर के प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय भेजा। इसके बाद जूम एयर को लेटर ऑफ इंटेंट भी जारी हुआ, लेकिन विकास कार्य पूरे न हो पाने के कारण हवाई उड़ान की उम्मीदें धूमिल रहीं।