इनमें करोड़ों रुपये लागत वाली देशी-विदेशी शटललेस, निटिंग, डबलर, ट्विस्टर आदि मशीनें लगी हैं, जो ज्यादा बिजली की खपत करती हैं। हथकरघा विभाग द्वारा इस बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद बिजली विभाग ने इन पर कार्रवाई नहीं की।
सात महीने के बिल में आठ करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी
सरकार ने जनवरी, 20 में बुनकरों के लिए नया टैरिफ जारी किया था। इसमें बुनकरों को 240 यूनिट तक 3.50 रुपये यूनिट की दर से भुगतान करना था। इससे अधिक यूनिट का भुगतान व्यावसायिक दरों पर होना था। 31 जुलाई से यह आदेश निष्पभावी है। इसके बाद शहर में 12575 बुनकरों को 1398.73 लाख रुपये का बिल भेजा गया।
इसमें बुनकरों को केवल 583.58 लाख रुपये का भुगतान करना था। 814.65 लाख रुपये सब्सिड़ी सरकार को वहन करना था। एक अगस्त, 20 से फिर फ्लैट रेट हो गए लेकिन शासनादेश जारी नहीं होने से बिल जमा नहीं हो रहे हैं। फ्लैट रेट में आधे हॉर्स पावर की मशीन के लिए 65 रुपये प्रतिमाह और एक हॉर्स पावर मशीन के लिए 130 रुपये प्रतिमाह बिल देना पड़ता है।
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