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Exclusive: बुनकरों की आड़ में करोड़ों की सब्सिडी ले रहे उद्यमी, पीवीवीएनएल नींद में, जांच के बावजूद कार्रवाई नहीं

Tue, 02 Mar 2021 11:11 AM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • पावरलूम कनेक्शन पर ट्विस्टर जैसी ज्यादा बिजली खपत करने वाली मशीनें लगाईं
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बुनकर कारखाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिमांचल में बुनकरों के नाम पर बिजली बिलों में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। सस्ती दरों पर बिजली के लिए उद्योगपति बुवकर बनने के साथ ही बुनकर कनेक्शन पर उन मशीनों को चला रहे हैं, जो पावरलूम कनेक्शन के दायरें में नहीं आती हैं। पीवीवीएनएल अधिकारी इन पर मेहरबान हैं और इन्हें सस्ती दरों पर बिजली भी मुहैया करा रहे हैं। देय बिल में 140 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है।  

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सरकार बुनकरों की मदद के लिए वास्तविक दरों के मुकाबले उनसे करीब दस फीसदी राशि ही लेती है। बाकी राशि का भुगतान सरकार खुद सब्सिडी के रूप में करती है। पीवीवीएनएल में बुनकर श्रेणी के करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता हैं। मेरठ जोन में भी इनकी संख्या बीस हजार से ज्यादा है। पावर कारपोरेशन को सब्सिडी का भुगतान हथकरघा विभाग करता है। 

सर्वेक्षण में मिली थीं 20 से 60 हॉर्स पावर तक की मशीनें
योजना में 1 या 2 हॉर्स पावर की ही पावरलूम मशीनें लगाई जा सकती हैं। बावजूद इसके फैक्टरियों में धागे को ट्विस्ट करने की कीमती मशीनें चल रही हैं। इनमें 20-60 हॉर्स पावर की मोटर लगी है। 2018 में योगी सरकार ने हथकरघा विभाग से सर्वें कराया था। इसमें पाया गया कि शहर, परतापुर, उद्योगपुरम, मोहकमपुर, माधवपुरम, लिसाड़ी गेट, बुनकर नगर, गोलाकुआं और काजीपुर क्षेत्र में बड़ी फैक्टरियों में भी बुनकर कनेक्शन लगे हैं।

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इनमें करोड़ों रुपये लागत वाली देशी-विदेशी शटललेस, निटिंग, डबलर, ट्विस्टर आदि मशीनें लगी हैं, जो ज्यादा बिजली की खपत करती हैं। हथकरघा विभाग द्वारा इस बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद बिजली विभाग ने इन पर कार्रवाई नहीं की।

सात महीने के बिल में आठ करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी
सरकार ने जनवरी, 20 में बुनकरों के लिए नया टैरिफ जारी किया था। इसमें बुनकरों को 240 यूनिट तक 3.50 रुपये यूनिट की दर से भुगतान करना था। इससे अधिक यूनिट का भुगतान व्यावसायिक दरों पर होना था। 31 जुलाई से यह आदेश निष्पभावी है। इसके बाद शहर में 12575 बुनकरों को 1398.73 लाख रुपये का बिल भेजा गया।

इसमें बुनकरों को केवल 583.58 लाख रुपये का भुगतान करना था। 814.65 लाख रुपये सब्सिड़ी सरकार को वहन करना था। एक अगस्त, 20 से फिर फ्लैट रेट हो गए लेकिन शासनादेश जारी नहीं होने से बिल जमा नहीं हो रहे हैं। फ्लैट रेट में आधे हॉर्स पावर की मशीन के लिए 65 रुपये प्रतिमाह और एक हॉर्स पावर मशीन के लिए 130 रुपये प्रतिमाह बिल देना पड़ता है।

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