हारी विधानसभा सीटों पर सपा के प्रत्याशी घोषित होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। बसपा पहले ही अपने विधानसभा प्रभारी घोषित कर चुकी है। भाजपा में टिकट के दावेदार आला नेताओं के चक्कर काट रहे हैं, तो रालोद और कांग्रेस के नेता अभी वेट एंड वॉच की मुद्रा में हैं। खास बात यह है कि सपा ने कई मुस्लिम नेताओं को अपने पाले में लाने के लिए अंदरखाने जोड़तोड़ शुरू कर दिया है तो हस्तिनापुर सीट पर नया प्रयोग करने की चर्चा है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव की प्रारंभिक पटकथा अप्रैल में सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में हारी हुई जिले की तीन सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं। इसके बाद चर्चा यह है कि सपा ने दूसरे दलों से जुड़े कई मुस्लिम नेताओं पर डोरे डालने शुरू कर दिये हैं। अभी यह बात पार्टी हाईकमान तक प्रारंभिक स्तर पर ही पहुंचाई गई है। हालांकि, कई स्थानीय नेता इस दिशा में काम कर रहे हैं। प्रत्याशियों की घोषणा से इन नेताओं के प्रयासों को झटका जरूर लगा है, लेकिन इसे आगे बढ़ाने की नये सिरे से तैयारी हो रही है। मेरठ के एक मुस्लिम नेता को अपने पाले में करने के लिये भी सपा के कुछ नेता लगे हुये हैं।
क्या है हस्तिनापुर में नया फार्मूला
बताया जा रहा है कि कुछ सपाई हस्तिनापुर से नया फार्मूला तैयार कर रहे हैं। हालांकि, हस्तिनापुर सीट सपा के ही कब्जे मे है और वेस्ट यूपी में सीटिंग विधायकों के टिकट कटने की संभावना कम ही है। इसके बावजूद स्थानीय सपा नेता एक गुर्जर परिवार में आई दलित वर्ग की बहू पर दांव लगाने का फार्मूला सुझा रहे हैं। पार्टी आलाकमान तक अभी यह बात नहीं पहुंची है, लेकिन इसे लेकर चर्चाएं खूब हैं। सपा में दक्षिण सीट पर बेशक आदिल चौधरी का टिकट फाइनल कर दिया गया है, पर यहां पर भी मलिक और सैफी बिरादरी के समीकरण को पार्टी के बड़े नेताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
अप्रैल में साफ होगी बसपा की रणनीति
बसपा ने कई सीटों से अपने विधानसभा प्रभारी घोषित कर दिए हैं। अब माना जा रहा है कि बची सीटों के लिये अप्रैल के पहले पखवाड़े में घोषणा हो जाएगी। इसमें सरधना सीट पर इमरान कुरैशी के नाम पर सभी की निगाह टिकी है। फिलहाल, सिवालखास से कोकब हमीद के बेटे अहमद हमीद पार्टी के प्रत्याशी हैं और पूरी संभावना है कि उन्हें बागपत सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा। ऐसे में सिवालखास से नदीम चौहान का रास्ता साफ होने की पूरी संभावना है। बताया जा रहा है कि अभी से घोषित प्रत्याशियों के टिकट अंतिम समय तक बदले जा सकते हैं। ऐसे में सभी को हिदायत है कि वे मजबूती से अपने क्षेत्र में काम करें।
अपने लिए लॉबिंग, दूसरों की मुखालफत
भाजपा में अभी टिकट वितरण को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं है, लेकिन टिकट मांगने वालों ने पूरी ताकत लगा रखी है। दक्षिण सीट पर टिकट चाहने वालों की संख्या ज्यादा है। कहा जा रहा है कि कई दावेदारों ने अभी से संघ और पार्टी के आला नेताओं के चक्कर काटने शुरू कर दिए हैं। कैंट से भी टिकट चाहने वालों की कमी नहीं है। इसके अलावा सिवालखास पर पार्टी के कई दिग्गज अपने टिकट की चाह में दूसरे के बारे में भी पूरा फीडबैक पार्टी नेताओं तक पहुंचा रहे हैं। किठौर से किसी त्यागी को टिकट मिलने की चर्चा के बीच कई त्यागी नेताओं ने अपने पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है।
रालोद में बस सिवालखास की चाह
एक-दूसरे की खिलाफत की सियासत में टिकट किसके खाते में आएगा, यह देखने वाली बात होगी। वहीं, रालोद का शीर्ष नेतृत्व वैसे तो गठबंधन या विलय की संभावनाएं तलाश रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नेताओं की चाह सिवालखास के टिकट तक ही है। मेरठ से जुड़े अधिकांश बड़े नेताओं की चाह सिवालखास से ही टिकट लेने की है। इसके लिए बाकायदा चौ. अजित सिंह से लेकर जयंत चौधरी तक लामबंदी की जा रही है। कांग्रेस में अभी संगठन स्तर पर ही तैयारी चल रही है।