रोडवेज को सालाना 130 करोड़ का झटका दे रही डग्गामार बसें
मेरठ। शहर से दिल्ली, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, गजरौला और मुरादाबाद आदि रूट पर दौड़ रही करीब 180 डग्गामार बसें न केवल यात्रियों के जीवन से खिलवाड़ कर रही है बल्कि रोडवेज को भी सालाना करीब 130 करोड़ रुपये का झटका दे रही है। सत्ताधारी नेताओं, परिवहन विभाग और पुलिस की तिकड़ी के आशीर्वाद से डग्गामार वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रोडवेज एमडी नवदीप रिनवा ने इस पर लगाम लगाने को कहा है। इसके लिए उन्होंने हर महीने परिवहन विभाग और रोडवेज अधिकारियों को संयुक्त चेकिंग अभियान चलाकर इन्हें सीज करने और टोल प्लाजा से भी लंबी दूरी के अवैध वाहनों की सूची लेकर इन पर लगाम कसने को कहा है। वहीं, डग्गामारों ने अपनी बसों का रंग न केवल रोडवेज की बसों जैसा करा रखा है बल्कि बसों की साइड में उत्तर प्रदेश परिवहन की जगह उत्तर प्रदेश परिवार लिखवा रखा है। रोडवेज बस होने के भ्रम में यात्री डग्गामार बसों में बैठ जाते हैं।
जीवन की नहीं कोई सुरक्षा
रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्रियों के टिकट राशि में ही बीमे का प्रीमियम भी शामिल होता है। दुर्घटना की स्थिति में यात्री को क्लेम दिया जाता है, लेकिन डग्गामार बस में यात्री का जीवन सुरक्षित नहीं होता है।
दौड़ रही 180 डग्गामार बसें
शहर से करीब 180 डग्गामार बसों का संचालन हो रहा है। आमतौर पर एक बस रोजाना करीब 20 हजार रुपये की कमाई करती है। 180 बसों की कमाई पर नजर डाले तो तो यह कमाई 36 लाख रोजाना बैठती है। महीने में कमाई का आंकड़ा 10.80 करोड़ रुपये और सालाना 129.60 करोड़ रुपये बैठता है।
किस रूट पर कितनी डग्गामार बस
रूट बसों की संख्या
मेरठ-गढ़-गजरौला-मुरादाबाद 64
मेेरठ-मुजफ्फरनगर 26
मेरठ-कौशांबी 90
कुल बस 180
क्या बोले अधिकारी
रोडवेज ने सर्वे कराकर परिवहन विभाग को 180 डग्गामार बसों की सूची सौंप रखी है। इन बसों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अब रोडवेज एमडी ने फिर से बसों की सूची तैयार करने और परिवहन विभाग के साथ संयुक्त चेकिंग करने को कहा है। इसका पालन किया जाएगा। - केके शर्मा, आरएम रोडवेज मेरठ रीजन