इस दौरान टीम में आबकारी निरीक्षक शोभित कुमार, आबकारी सिपाही मदनपाल, पंकज तोमर, मोहित कुमार, श्रीकांत सोम, सन्नी तोमर, उपनिरीक्षक थानाभवन आज्ञाराम, कांस्टेबल सुनील कुमार, लोकेश कुमार आदि शामिल रहे।
शहर से लेकर देहात तक खपाई जा रही थी शराब
गांव चंदेनामाल में शराब बनाने में रेक्टीफाइड के अलावा व्हाइट रोज (केलेमर) का इस्तेमाल भी किया जा रहा था। शराब बनाने में एल्कोहल की निर्धारित मात्रा का ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन अवैध रूप से बनाई जा रही शराब में मानक का कोई पैमाना नहीं होता है। शराब बनाने वाले माफिया इतने शातिर हैं कि उन्होंने अवैध रूप से बनाई गई शराब को तोहफा और अन्य ब्रांड के नाम से पैकिंग करके असली की तरह बेचना शुरू कर दिया था। गांव से लेकर शहर तक इसे असली बता कर खपाया जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक यह शराब मिलीभगत कर कुछ सरकारी ठेकों पर भी खपाई जा रही थी। इस बारे में पुलिस और आबकारी अधिकारी जांच करने की बात कह रहे है।
किसके संरक्षण में चल रहा था खेल
चंदेनामाल गांव में अवैध शराब की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हो गया, लेकिन अब तक यह खेल किसके संरक्षण में चल रहा था? यह भी बड़ा सवाल है। गौरतलब है कि जलालाबाद क्षेत्र में अवैध रूप से शराब की बिक्री काफी समय से चल रही है। वहीं, काफी दिन तक जलालाबाद क्षेत्र में आबकारी की शराब की दुकानों का आवंटन नहीं हुआ था, जिस कारण अवैध शराब की बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही थी।
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