रागिनी के जरिए जताया विरोध
धरने के दौरान किसानों ने अपनी मांगों और नाराजगी को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक लोक शैली रागिनी का सहारा लिया। रागिनी के माध्यम से दबथुवा गांव के किसानों की समस्याओं और चकबंदी प्रक्रिया को लेकर उनके विरोध को सामने रखा गया।
किसानों ने लोकगीतों के जरिए आरोप लगाया कि हजारों सहखातेदारों की राय की अनदेखी कर सीमित लोगों के हस्ताक्षरों के आधार पर पूरे गांव की सहमति दर्शाई जा रही है। इस अनूठे विरोध के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने का प्रयास किया।
28 नवंबर तक का अल्टीमेटम, लखनऊ कूच की चेतावनी
भाजपा नेता अनिल दबथुवा के नेतृत्व में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 28 नवंबर 2026 तक चकबंदी निरस्त करने के पक्ष में निर्णय नहीं लिया गया, तो गांव के 90 प्रतिशत खातेदार और सहखातेदार पंचायत के निर्णय के अनुसार अपने परिवारों के साथ ट्रैक्टरों से लखनऊ पहुंचेंगे। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी समस्याएं और मांगें रखेंगे।
फिलहाल किसानों की मुख्य मांग आख्या रिपोर्ट की जांच, सहमति के आंकड़ों की पड़ताल और चकबंदी प्रक्रिया पर उचित निर्णय लेने की है। मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।