मेरठ में एडीजे/विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) मो. गुलाम उल मदार ने देवरानी की हत्या में जेठानी को हत्या व जानलेवा हमले का दोषी पाते हुए उम्रकैद और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। घटना करीब सात साल पहले सरधना थाना क्षेत्र में घटी थी।
सरकारी वकील शुची शर्मा के अनुसार वादी राजेंद्र सिंह निवासी गांव पोहल्ली ने 16 मार्च 2012 को थाना सरधना में मुकदमा दर्ज कराया कि उसका छोटा भाई सूरजभान और उसकी पत्नी जंगल जा रही थी। तभी उसके दूसरे भाई नेपाल व उसकी पत्नी निशा उर्फ सरोज ने रंजिश के वजह से शशि पर केरोसिन छिड़ककर आग लगा दी। जिसे बचाने में सूरजभान भी झुलस गया। झुलसे दंपती को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान शशि की मृत्यु हो गयी। पुलिस ने जांच के बाद हत्या व जानलेवा हमले का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
एडीजे/विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) मो. गुलाम उल मदार ने शशि की हत्या का दोषी पाते हुए जेठानी निशा उर्फ सरोज को सजा सुनाई। वहीं आरोपी नेपाल की मृत्यु हो चुकी है। शशि के पति की भी मौत हो चुकी है। दंपती से कोई संतान न होने पर अर्थदंड की राशि राजकीय कोष में जमा कराई जाएगी।
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