डॉ. शालिनी आर्य मर्डर के मामले में परिजनों ने अधिवक्ताओं के साथ डीआईजी से मुलाकात की। डीआईजी रेंज ने पूरे मामले में जांच बैठा दी है। परिजनों का आरोप है बिसरा जांच में पुलिस खेल रही है। अधिवक्ताओं ने अहमदाबाद लैब से बिसरा की जांच कराने की मांग की है।
डॉ. शालिनी की बहन शिल्पी अपने रिश्तेदार राजकुमार और अधिवक्ता जगदीश पावटी, हर्ष चौधरी के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंचीं। कप्तान के न मिलने पर पीड़ित लोगों ने डीआईजी से शिकायत करते हुए कहा कि हत्या के 25 दिन बाद पुलिस ने दूसरा बिसरा जांच के लिए कैसे भेज दिया।
पोस्टमार्टम होने के बाद पुलिस ने बिसरा जांच के लिए फोरेंसिक लैब आगरा भेजा था, तो अब पुलिस के पास दूसरा बिसरा कैसे पहुंच गया। पूरे मामले में पुलिस लीपापोती कर खेल करने में लगी है। मौत के बाद पुलिस ने मकान से कोई सबूत नहीं जुटाए। 15 दिन बाद आरोपी डॉ. विशाल आर्य की गिरफ्तारी हुई तो पुलिस जांच पड़ताल के लिए घर पहुंच गई।
परिजनों ने कहा कि तीन दिन पहले पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया गया और पुलिस तमाशबीन बनी रही। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने जो बिसरा दोबारा भेजा है उन्हें यकीन नहीं है कि वह शालिनी का है। पूरे मामले में दोनों अधिवक्ताओं ने कहा कि इस मामले में केस की विवेचना करने वाले आईओ पर कार्रवाई की जाए। डीआईजी आशुतोष कुमार ने पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है।