केस तीन : बड़ौत के रहने वाले यूपी पुलिस से रिटायर्ड कांस्टेबल सुरेश पाल के खाते से 19 जून को आठ लाख 55 हजार रुपये की साइबर ठगी हुई थी। साइबर सेल ने उनके 2 लाख 81 हजार 693 रुपये वापस कराए है।
केस चार : जून माह में ही बड़ौत की पट्टी मीरापुर की नेहा चौहान पत्नि अंशुल सिंह के साथ 97 हजार रुपये की ठगी हुई थी। साइबर सेल ने उनकी शत-प्रतिशत राशि वापस कराई है।
सर्तकता बरतकर बचे साईबर ठगी से
साइबर सैल प्रभारी राजीव सक्सेना का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए कभी भी अपना सीवीवी, ओटीपी किसी को ना बताएं। लॉटरी, कोड स्कैन करने से बचें। अपनी पर्सनल डिटेल किसी को ना दें।
इसके अलावा अगर कोई भी अनजान आपसे फोन पर किसी एप को डाउनलोड करने या लॉटरी आदि का लालच दे, ऐसे में अपनी पर्सनल जानकारी न दे। सर्च इंजन पर किसी भी प्रकार का कस्टमर केयर नंबर को सर्च न करें। बताया कि सेल की ओर से पूर्व जिले में भर में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें लोगों को साइबर ठगी से बचाव के बारे में जानकारी दी गई थी।
तुरंत साइबर सेल को दें जानकारी
ठगी होते ही सूचना देने पर रकम वापस होने के चांस ज्यादा रहते है। जिस खाते में धनराशि स्थानांतरित हुई है, उसे फ्रीज करा दिया जाता है। ठगी का शिकार हुए व्यक्ति के आधार कार्ड, कैंसिल चेक, बैंक डिटेल जमा कर उसकी धनराशि वापस करा दी जाती है।
ऐसे पकड़े जाते है साइबर ठग
साइबर सेल के प्रभारी राजीव सक्सेना ने बताया कि ठगी होने पर सेल जिस खाते में रकम स्थानांतरित हुई, उसकी निगरानी कर खाता धारक का पता मालूम करती है। खाते से होने वाली ऑनलाइन शॉपिंग, एटीएम से निकासी होने पर वहां के विजुअल चेक किए जाते है। यह भी चेक किया जाता है कि पैसे की निकासी असली एटीएम से हुई है या एटीएम के क्लोन से।
संबधित थाने को सौंप देते है आरोपी को
ठगी करने वाले की पहचान होने पर आरोपी को संबधित थाने की पुलिस को सौंपकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जाती है।