मेरठ। इकराम हत्याकांड में लिसाड़ी गेट पुलिस ने रविवार को आरोपी प्रेमिका और इकराम के साढ़ू को जेल भेज दिया। पुलिस दोनों आरोपियों से तीन दिन से पूछताछ कर रही थी।
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने बताया कि बड़ा गांव परीक्षितगढ़ निवासी इकराम चार जून को अपनी कार से लिसाड़ी गेट क्षेत्र में गया था। इकराम का फरीदा के घर आना-जाना था। महिला फरीदा का पति फौज में था, जिसकी कई साल पहले मौत हो गई थी। करीब 11 साल से दोनों के बीच संबंध थे। वहीं इकराम का साढ़ू इमरान निवासी कैली रामपुर थाना परीक्षितगढ़ भी छह माह से फरीदा के संपर्क में था।
सीओ ने बताया कि विगत चार जून की शाम जब इकराम घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने काफी तलाश के बाद परीक्षितगढ़ थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। बाद में इकराम की कार लिसाड़ी गेट में फरीदा के घर के पास लावारिस मिली। जिसके बाद परिजनों ने फरीदा और इमरान के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कराया था।
17 जून को लिसाड़ी गेट के पास तालाब में लावारिस हालत में शव मिला था। जिसकी शिनाख्त परिजनों ने इकराम के रूप में की थी। मोबाइल की कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने फरीदा और उसके प्रेमी इमरान को गिरफ्तार कर लिया था।
यह बनी थी वजह
इंस्पेक्टर लिसाड़ी गेट मोहम्मद असलम ने बताया कि चार जून की रात फरीदा के कमरे पर उसका प्रेमी इमरान मौजूद था। देर रात नशे की हालत में इकराम भी वहां पहुंच गया था। इकराम ने वहां इमरान को सोते देखा था तो तैश में आकर फरीदा को थप्पड़ जड़ दिया था। इस दौरान महिला ने कहा कि अब रात हो गई और सुबह वह पूरा मामला बता देगी। बाद में इमरान और फरीदा ने थप्पड़ का बदला लेने के लिए इकराम की गला दबाकर हत्या कर दी थी और शव को नूरनगर हाल्ट के पास तालाब में फेंक दिया था। बाद में इमरान की कार से घर लौटकर उसे लावारिस छोड़कर गायब हो गए थे।
परिजनों ने जताया था शक
पुलिस के अनुसार इकराम के परिजनों ने ही आरोपी महिला पर शक जताया था। महिला के गायब होने पर परिजनों ने थाना लिसाड़ी गेट में हंगामा भी किया था। पुलिस पर भी इस केस में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। वहीं, जब इकराम के शव की शिनाख्त हुई थी तो सामने आया था कि लिसाड़ी गेट पुलिस ने इकराम के अपहरण के केस में कोई खास वर्क नहीं किया था।