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नौकरी लगवाने के नाम पर करोड़ां की ठगी का सरगना गिरफ्तार

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- कमिश्नर बताकर करीब दो हजार अभ्यर्थियों से की करोड़ों की ठगी
- बिहार निवासी ठग ने यूपी, एमपी, पंजाब, राजस्थान में फैलाया जाल
- साइबर सेल ने पकड़ा, सरकारी नौकरी के नाम पर की जाती थी ठगी
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करते आ रहे गैंग के सरगना को रविवार शाम साइबर सेल और मवाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार खुद को कमिश्नर बताकर करीब दो हजार अभ्यर्थियों से ठगी कर चुके इस आरोपी ने यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और बिहार में जाल फैला रखा था।
एएसपी सतपाल सिंह ने बताया कि स्काउट/गाइड आग्रेनाइजेशन की संस्था को सरकारी संस्था बताकर बेरोजगार युवाओं को ठगा जाता था। डीओसी (जिला संगठन आयुक्त), ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) व स्काउट गाइड कैप्टन के पद पर सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर अलग- अलग राज्यों में ठगी की गई। पकड़ा गया आरोपी राजकिशोर प्रसाद सिन्हा मूल निवासी युगल मेनसन कंकड़ बागत पटना है। वह वर्तमान में राधेश्याम पार्क एक्सटेंशन लक्ष्मीनगर दिल्ली में रह रहा था। आरोपी के नोएडा में तीन और दिल्ली में दो फ्लैट हैं। आरोपी के पास से दो आईफोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वीजा कार्ड और अन्य बैंकों के एटीएम और अन्य कागजात, एक रॉडो की घड़ी, सोने और हीरे की आठ अंगूठियां बरामद की गई हैं।
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कई राज्यों में फैलाया है जाल
एएसपी सतपाल सिंह के अनुसार मवाना के कौल गांव निवासी दिग्वेश ने मवाना थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें आरोप लगाया था कि राजकिशोर ने सरकारी नौकरी के नाम पर सात लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले की शिकायत पर डीआईजी अखिलेश कुमार ने एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक और एसपी देहात राजेश कुमार को इस गैंग का खुलासा करने के निर्देश दिए थे। गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसने संस्था के नाम से सरकारी नौकरी का झूठा आश्वासन देकर प्रत्येक युवा से 5-8 लाख रुपये तक की ठगी की। इसके लिए अलग-अलग राज्यों में बैंक खाते खोले गए थे।
संस्था नहीं मिली रजिस्टर्ड
साइबर सेल की जांच में सामने आया कि उत्तर प्रदेश स्काउट एंड गाइड्स स्काउट भवन लालकुर्ती मेरठ व भारत स्काउट एंड गाइड्स के राष्ट्रीय मुख्यालय से जानकारी की गई तो पता चला कि स्काउट गाइड ऑग्रेनाइजेशन के नाम से संस्था फर्जी पाई गई। मिनिस्ट्री ऑफ यूथ अफेयर्स एवं वर्ल्ड ब्यूरो से यह संस्था मान्य नहीं है। जिसके बाद मवाना थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। इस गिरोह में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जिन्हें कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर बताकर लोगों से ठगी की जाती थी। करीब दस साल से यह गैंग ठगी कर रहा था।
कमिश्नर बताकर देता था झांसा
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक ने बताया कि राजकिशोर प्रसाद सिन्हा ने साल 1985 में उच्च विद्यालय महाराजगंज से स्काउट गाइड की ट्रेनिंग करने के बाद ऑल इंडिया ब्वॉयज स्काउट को ज्वाइन किया। साल 1999 में आरोपी ने युवकों को अच्छे पदों पर सरकारी नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया। संस्था से युवकों को जोड़ा। अपने को संस्थान में नेशनल कमिश्नर ऑफ इंडिया के पद पर बताया। संस्था में डायरेक्टर चीफ, एक्जीक्यूटिव ऑफिसर बताकर बेरोजगार युवकों से ठगी की गई। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि करीब दो हजार युवकों से रजिस्ट्रेशन चार्ज, ट्रेनिंग चार्ज, ड्रेस फीस व अन्य चार्ज लेकर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फर्जी तरह से ट्रेनिंग भी दिला देता था। एक माह की ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही युवकों से पांच से आठ लाख रुपये भी ठग लेता था।
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उच्चशिक्षा प्राप्त, करोड़पति ठग
एसपी क्राइम के अनुसार करीब 51 वर्षीय राजकिशोर के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति बताई गई है। जिसके बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में सामने आया है कि वह मगध यूनिवर्सिटी से एमकॉम की पढ़ाई कर चुका है। धोखाधड़ी के मामले में तीन बार पटना से जेल जा चुका है। आरोपी ने मोहम्मद फहाद को संस्था में ओएसडी का पद दे रखा है, जिसने नोएडा और दिल्ली में ऑफिस खोल रखे हैं।
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