मेरठ। जिस बेटे के दरोगा बनने पर माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा होना था, उन्हीं ने 50 लाख की जमीन के लालच में बेटे की ढाई लाख रुपये में सुपारी देकर हत्या करा दी। एसपी देहात ने यह दावा करते हुए संजीव हत्याकांड का खुलासा कर दिया। हत्यारोपी दंपति समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
मामला भावनपुर थाना क्षेत्र का है। एसपी देहात राजेश कुमार और सीओ सदर देहात विजय प्रकाश ने प्रेस वार्ता में बताया कि गांव किनानगर निवासी संजीव उर्फ सन्नू (24) पुत्र ओमपाल चौधरी ने यूपी पुलिस में दरोगा की परीक्षा दी थी, जिसका अभी रिजल्ट आना था। 21 फरवरी को संजीव घर से लापता हो गया था। 23 फरवरी को संजीव के छोटे भाई अभिषेक हाल निवासी घुंघरावली जिला बुलंदशहर ने भावनपुर थाने में संजीव की गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
पिता और सौतेली मां पर जताया था शक
26 फरवरी को अभिषेक ने एसओ भावनपुर आशुतोष कुमार से मिलकर अंदेशा जताया था कि उसके पिता ओमपाल और सौतेली मां सुरेखा ने भाई संजीव की अपहरण के बाद हत्या करा दी। सर्विलांस के आधार पर जांच के बाद एसओ ने आरोपी दंपति से पूछताछ की तो केस खुल गया। आरोपी पिता ने जिस मोबाइल नंबर से कॉल की थी, उसी से पुलिस सुपारी किलर तक पहुंची।
दूसरी शादी पर था एतराज
एसपी देहात के अनुसार ओमपाल ने बताया कि संजीव उसकी पहली पत्नी पुष्पा से बेटा था। 12 साल पहले पुष्पा उसे छोड़कर चली गई थी तो उसने सुरेखा से शादी कर ली थी। जिसके चलते संजीव उनसे नफरत करने लगा था। उसे अंदेशा था कि मैं गांव की करीब 50 लाख की पांच बीघा जमीन सुरेखा के नाम न कर दूं। कई बार संजीव ने मुझे धमकी दी थी। जिसके बाद मैं सुरेखा के साथ गाजियाबाद के रोरी गांव में जाकर रहने लगा था। उसके बाद भी संजीव हमें धमकाता था।
छुटकारा पाने की बनाई योजना
ओमपाल ने बताया कि गांव की जमीन पर कब्जा करने के लिए उसने और सुरेखा ने संजीव की अपहरण के बाद हत्या कराने की योजना बनाई थी। ओमपाल ने अपने साले महेश, ग्राम काशी के बदलू व गांव रोरी के सुनील से संपर्क किया। सुनील ने ढाई लाख रुपये में हत्या की सुपारी ली। 35 हजार रुपये एडवांस लिए थे। इस केस में मोदीनगर निवासी अजय व दीपक भी साथ थे।
शराब पिलाकर जताया विश्वास, फिर काट डाला
आरोपी दंपति ने बताया कि संजीव तेज तर्रार था, जिसे झांसे में लेना आसान नहीं था। उसे हमने गाजियाबाद की लड़की से शादी करने के लिए मना लिया था। लड़की दिखाने के बहाने 20 फरवरी को अशोक, सुनील व दीपक किनानगर पहुंचे थे। तीनों आरोपियों ने संजीव के साथ बैठकर शराब पी। उसके बाद उसे घुमाने ले गए थे। 21 फरवरी को फिर संजीव को नंगलामल शुगर मिल के पास एक ट्यूबवेल पर ले जाकर शराब पी। 22 फरवरी को संजीव को भोजपुर थाना क्षेत्र के बहादुरपुर गांव में ले गए थे। जहां ओमपाल और सुलेखा को बुला लिया गया था। वहां एक खेत पर शराब पीने के बाद जब संजीव नशे में धुत हो गया था तो उसकी धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। शिनाख्त मिटाने के लिए पिता ने मोबाइल जला दिया था और पर्स बेड में छिपा दिया था। 25 फरवरी को गाजियाबाद पुलिस ने शव बरामद किया था। लेकिन शिनाख्त न होने पर 72 घंटे बाद लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया था। हत्या में ओमपाल और सुरेखा के अलावा बदलू पुत्र मुमताज निवासी गांव काशी परतापुर, अशोक पुत्र ओमपाल निवासी गोविंदपुरी, मोदीनगर और दीपक पुत्र रमेश चंद निवासी डबल स्टोरी गोविंदपुरी, मोदीनगर को गिरफ्तार किया गया है।
इंटर कॉलेज किया था टॉप
एसपी देहात ने बताया कि संजीव ने 12वीं में इंटर कॉलेज टॉप किया था। उसके बाद बीएससी में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। यूपी पुलिस में दरोगा भर्ती में लिखित परीक्षा हो चुकी थी। अपने दोस्तों और छोटे भाई से यही कहता था कि नंबर अच्छे हैं, वह सब इंस्पेक्टर बन जाएगा।
खास बातें:
संजीव हत्याकांड का खुलासा, पिता और सौतेली मां समेत पांच गिरफ्तार
50 लाख की जमीन के लिए अपनों ने ही दी थी ढाई लाख की सुपारी