कस्बे के मुख्य बाजार स्थित एक दुकान को लेकर बीते बुधवार को नवनिर्वाचित चेयरपर्सन पति और पूर्व चेयरमैन समर्थकों में खूनी संघर्ष हो गया था। शुक्रवार को मुजफ्फरनगर जिले के बसपा के एक कद्दावर नेता और किठौर के एक वकील के माध्यम से मेरठ स्थित एक वकील के आवास पर दोनों पक्षों में समझौता होने का मामला प्रकाश में आ रहा है। हालांकि चेयरपर्सन पति ने चुप्पी साध ली। वहीं, पूर्व चेयरमैन ने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, एसओ ने कहा कि कस्बे में समझौते की चर्चा है। हालांकि पुलिस का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों की ओर से कोई निर्देश नहीं मिला है।
सूत्रों के अनूसार मुजफ्फरनगर जिले के बसपा के एक कद्दावर नेता दोनों पक्षों के रिश्तेदार बताए गए हैं। वहीं, एक अधिवक्ता भी दोनों पक्षों का बहुत करीबी बताया गया है। ये दोनों ही चेयरपर्सन पति और पूर्व चेयरमैन पक्ष में समझौता कराने के प्रयास में जुटे थे। यही नहीं पुलिस अधिकारियों से भी उक्त नेता लगातार संपर्क बनाए हुए थे। बताया कि शुक्रवार शाम को दोनों पक्ष के लोग मेरठ स्थित एक वकील के यहां पहुंचे। यहां बातचीत के बाद दोनों में समझौता कराया। वहीं, रात में ही सभी के शपथ-पत्र तैयार कराकर शनिवार सुबह उक्त बसपा नेता पूर्व चेयरमैन के आवास पर हस्ताक्षर कराने पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों में समझौता होने की चर्चाएं चल रही हैं। इस मामले में एसओ राजेन्द्र कुमार त्यागी का कहना है कि समझौता होने की बात सामने अवश्य आई है। हालांकि उनके पास अभी कोई अधिकारिक सूचना नहीं आई है। समझौते से उनको कोई लेना-देना नहीं है। शांति व्यवस्था के लिए कस्बा में अब भी पुलिस फोर्स तैनात है। इस मामले में फोन पर चेयरपर्सन पति सलमान मुनकाद बात की तो वह चुप्पी साध गए। वहीं, पूर्व चेयरमैन मतलूब गौड़ के बेटे ने फोन रिसीव कर इसके चार्जिंग पर लगे होने की जानकारी दी। इसके बाद फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, दूसरी ओर शुक्रवार देर रात कस्बे में चल रही व्हाट्स एप एवं फेसबुक पर इस मामले को तूल देने पर पुलिस ने कस्बा निवासी वाहिद के घर पर दबिश दी। पुलिस का कहना है माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बातें
मुजफ्फरनगर के कद्दावर बसपा के प्रयास से सुलह होने की चर्चा
दोनों पक्षों के रिश्तेदार बताए गए हैं उक्त बसपा नेता
चेयरपर्सन पति और पूर्व चेयरमैन पक्ष ने सुलह होने की पुष्टि नहीं की
पुलिस के पास भी समझौते की अधिकारिक जानकारी नहीं