कालकोठरी नहीं है होम क्वारंटीन
वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग जीतकर लौटी मंजू देवी का कहना है कि कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि होने के बाद एकबारगी तो वह घबरा गई। हौसला भी खोया कि उनके बाद परिवार का क्या होगा? महिला को घबराते देख अस्पताल के डॉ. राजेश कपूर ने उन्हें दिलासा दिया कि कोरोना साधारण खांसी-बुखार की तरह है, लेकिन उपचार लंबा चलेगा, जिसके बाद मन का भय दूर हो गया। मंजू ने बताया कि डॉक्टर और नर्स देवदूत हैं, उनका सम्मान करना चाहिए। उनके कक्ष में एक दिन में तीन नर्सों की ड्यूटी लगती थी। सभी ने उसे अपनापन दिया। अस्पताल में ही मौजूद बेटे से भी लगातार बात होती रहीं, जिससे जीवित रहने का हौसला बना रहा। उसने कहा कि होम क्वारंटीन कालकोठरी नहीं है। संक्रमण परिवार में न फैले, इसलिए संदिग्ध को अलग रखने का एक तरीका है, जो सबसे अच्छा बचाव है।
कैसे लगा संक्रमण, महिला को भी नहीं पता
सिसौली निवासी मंजू पत्नी प्रणपाल सिंह के परिवार में किसी की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। महिला खुद भी छह अप्रैल से पहले किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में नहीं आई। इसके बावजूद महिला कब और कैसे पॉजिटिव हो गई, इसकी खुद उसे भी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं, महिला में कोरोना संक्रमण के किसी तरह के लक्षण भी नहीं थे। महिला के परिजनों का कहना है कि पेट संबंधी बीमारी के चलते वे कई बार बड़ौत में डॉक्टर के पास गए। वहां आराम नहीं लगने पर महिला को नोएडा के अस्पताल में दिखाया, जहां छह अप्रैल को उसका ऑपरेशन हुआ। अब महिला कैसे और कब पॉजिटिव हुई, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है।
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