सहारनपुर में 82 साल के इतिहास में पहली बार कोरोना वायरस के चलते रामलीला शुरू नहीं हो सकी है। नगर की प्राचीन श्री रामलीला की शुरुआत बुधवार से होनी थी।
वर्ष 1942 में महामारी को दूर करने के लिए ही चैत्र मास में कस्बे के प्राचीन नकुलेश्चर महादेव मंदिर में पहली बार रामलीला का मंचन हुआ था। उस वक्त भी कुछ ऐसी ही महामारी ने जन्म ले लिया था, जिसको भगाने के लिए ही नगर वासियों ने प्रभु श्री राम को प्रसन्न करने के लिए चैत्र मास में ही रामलीला का मंचन शुरू कर दिया था।
यह भी पढ़ें: लॉकडाउन: सपा विधायक ने उड़ाई पीएम मोदी की अपील की धज्जियां, भीड़ जुटाने पर मुकदमे की तैयारी
नगर के वरिष्ठ बुजुर्ग बालेश्वर शास्त्री, पुन्ना मल शर्मा, लाला सुभाष चंद सर्राफ व सरस गोयल ने बताया कि उस वक़्त बिना बिजली के ही लालटेन व लैंप की रोशनी में भव्य रामलीला मंचन हुआ करता था।
रामलीला महोत्सव समिति के प्रधान बने संजय सिंघल ने बताया कि रामलीला मंचन के लिए सभी तैयारियां पूर्ण थी, शायद इस बार प्रभु श्री राम को हमारी यह सेवा मंजूर नहीं थी। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को राम नवमी पर्व पर अपने- अपने घरों में पांच- पांच दीपक जलाकर प्रभु से इस बीमारी से निजात दिलाने की प्रार्थना करने की अपील की जाएगी।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/