पिछले तीन माह से यह संख्या तीन हजार पार कर गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि एक दिन औसतन 3000 लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। इनमें जिला अस्पताल के अतिरिक्त शहर में अन्य स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जाती है। वहीं, देहात में अलग-अलग गांवों में भी प्राथमिक विद्यालय अन्य स्थानों पर कैंप लगाकर टेस्टिंग किए गए। हालांकि लोगों को इसका पता ही नहीं है कि उनके गांव में टेस्ट कब किया जाएगा।
आखिर क्यों नहीं दी जाती जानकारी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना की टेस्टिंग लेकर कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। किस इलाके में किस दिन कहां पर टेस्ट किया जाएगा। कहां-कहां कैंप लगाए जाने हैं। इसकी अधिकारिक जानकारी नहीं दी जाती है।
ऐसे में शहर में कॉलोनियों, मोहल्लों, देहात में अलग-अलग गांव में भी यह लोगों को पता नहीं है। टेस्टिंग के लिए कितने केंद्र हैं और कितनी टीम हैं। उसकी भी अब तक जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने नहीं दी है।
नहीं लगा कैंप
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में पांच दिन पहले कोरोना की टेस्टिंग लिए कैंप लगाया जाना था। हालांकि यहां कैंप नहीं लगाया गया। यहां के व्यापारी और स्थानीय लोग कई बार कैंप के आयोजन की मांग कर चुके हैं।
सीएचसी, हेल्थ सेंटर एवं अस्पतालों आदि में एकत्र किए जाने वाले नमूनों की जांच कराई जाती है। तीन कलेक्शन सेंटर काम कर रहे हैं। निजी अस्पताल भी जांच कराते हैं। इतना ही नहीं मरीजों के साथ उनके संपर्क में आने वालों की भी जांच की जाती है। इस प्रकार औसतन तीन से चार हजार नमूनों की प्रतिदिन की जाती है। सर्वे के दौरान कैंप लगाकर जांच की गई थी। आजकल शिविर नहीं लगाए जा रहे हैं।
-डॉ. राजकुमार सीएमओ
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