निजी अस्पतालों में क्या-क्या दवाइयां दी गईं, इसकी भी होगी पड़ताल
मुख्य विकास अधिकारी मेरठ की अध्यक्षता में जो चार सदस्यीय कमेटी बनी है, उसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज और आईएमए के प्रतिनिधि होंगे। कमेटी इस बात पर भी ध्यान देगी कि मरीज ने किन-किन अस्पतालों में इलाज कराया, उसको क्या-क्या दवाइयां दी गईं। ऑक्सीजन पर रखा गया था तो कितने दिन से वह ऑक्सीजन पर था। प्राइवेट अस्पताल द्वारा उसे कब और किस स्थिति में मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया।
'हालत बिगड़ने पर मेडिकल रेफर करते हैं निजी अस्पताल'
कमिश्नर ने कहा कि कई ऐसे मामले हैं जिनमें मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के कुछ समय बाद ही मरीज की मृत्यु हो गई। कई निजी अस्पतालों में बेहद गंभीर हालत में मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया। यह बेहद खेदजनक है। अगर समय रहते मरीज को मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
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