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Meerut News: स्मार्ट मीटर की बिलिंग प्रक्रिया और तकनीकी उलझनों में फंसे उपभोक्ता

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विक्टोरिया पार्क स्थित कार्यालय में स्मार्ट मीटर्स की जानकारी देते मुख्य अभियंता मेरठ प्रथम मुन - फोटो : अमर उजाला
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जनपद में बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। एक तरफ विद्युत अधिकारी व्यवस्था को चाक-चौबंद बता रहे हैं तो दूसरी तरफ धरातल पर उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड से प्रीपेड में बदलने के दौरान पुरानी सिक्योरिटी राशि के समायोजन की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
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उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बताया कि अधिकांश उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबर अपडेट नहीं हैं। बड़ी संख्या में सीलिंग सर्टिफिकेट पोर्टल पर नहीं दिख रहे हैं। उपभोक्ता यूपीपीसीएल एप डाउनलोड और इस्तेमाल करने में असमर्थ हैं। प्रीपेड मीटर के गारंटी कार्ड भी नहीं दिए जा रहे हैं और नए कनेक्शन के लिए अत्यधिक एस्टीमेट बनाकर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है। इन तमाम मुद्दों को लेकर अब मुख्यमंत्री से लिखित शिकायत की गई है।



हैरान हैं उपभोक्ता: बिल भरा और बैलेंस फिर माइनस

उपभोक्ताओं ने स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। निखिल अग्रवाल ने बताया कि 30 मार्च को 817 रुपये का बिल जमा किया, जिसकी अंतिम तिथि 9 अप्रैल थी। लेकिन बिल जमा करते ही मंगलवार को मोबाइल पर 300 रुपये से अधिक माइनस बैलेंस का मैसेज आ गया जिससे वे हैरान हैं। गंगानगर निवासी मनोज कुमार ने बताया कि पोस्टपेड से प्रीपेड होने के बाद उन्हें बार-बार इस प्रक्रिया के खर्च के मैसेज मिल रहे हैं जबकि विभाग इसे पूरी तरह नि:शुल्क बताता है।
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विकास का नया चरण है स्मार्ट मीटर : मुनीश चोपड़ा
दूसरी ओर मुख्य अभियंता वितरण क्षेत्र (मेरठ प्रथम) मुनीश चोपड़ा ने मंगलवार को विक्टोरिया पार्क स्थित कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मेरठ महानगर के 4 लाख उपभोक्ताओं में से 1,08,000 स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। जिनमें से 1,00,558 प्रीपेड हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि रिचार्ज खत्म होने पर बिजली कट जाएगी, लेकिन रिचार्ज करते ही 1 मिनट के भीतर कनेक्शन जुड़ जाएगा।

चोपड़ा ने बताया कि उपभोक्ताओं की मदद के लिए 1912 हेल्पलाइन नंबर और मेरठ के बिजलीघरों पर 7 हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। चोपड़ा ने दावा किया कि 23 मार्च को कटे 25 हजार कनेक्शनों में से 23 हजार रिचार्ज होते ही तुरंत जुड़ गए थे शेष को टीम भेजकर जुड़वाया गया। विद्युत अधिकारियों का कहना है कि यह एक नई व्यवस्था है और उपभोक्ताओं को यूपीपीसीएल एप के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है ताकि वे अपनी खपत और बैलेंस को खुद मॉनिटर कर सकें।
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