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बिना मान्यता के कॉलेज ने बांटीं हजारों फर्जी मार्कशीट  

Mon, 01 Jan 2018 02:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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बरामद कागजात। - फोटो : अमर उजाला
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भटीपुरा के जंगल में बिना मान्यता के चल रहे कॉलेज ने एक हजार से अधिक फर्जी मार्कशीट बांट दीं। पुलिस की जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा कर रखा था। 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में मार्कशीट और डिग्री दी गई थी। मुख्य आरोपी फरार है। पुलिस ने कॉलेज सील करते हुए पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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एसओ किठौर राजेंद्र त्यागी के अनुसार भटीपुरा गांव के जंगल में खेत में बने तीन कमरों के कॉलेज में शनिवार शाम छापा मारा गया था। जांच पड़ताल में सामने आया कि कॉलेज की मान्यता नहीं है। संचालक ने एक संस्था बनाकर कई राज्यों में फर्जी मार्कशीट और डिग्री देकर ठगी की है। छात्रा अनुराधा की तहरीर पर मो. नावेद निवासी सिवालखास थाना जानी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धारा में मामला दर्ज कर लिया है। संचालक के साथ संस्था के पांच लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। 

राजस्थान की यूनिवर्सिटी से संबद्ध
एसओ के अनुसार एएनजी कॉलेज ऑफ एजूकेशन नाम का यह कॉलेज राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी से संबद्ध बताया जा रहा था। जहां से बीए, एमए, बीएससी, बीबीए, एमबीए समेत अन्य कोर्सों की फर्जी मार्कशीट समेत डेढ़ हजार ब्लैंक मार्कशीट बरामद की गई हैं। माना जा रहा है कि कंप्यूटर और प्रिंटर के माध्यम से कॉलेज में ही मार्कशीट बनाई जा ही थी। 120 छात्रों की बैंक पासबुक और चेकबुक के अलावा अन्य सामान भी कब्जे में लिया गया है। इस गिरोह के सदस्य फर्जी मार्कशीट के नाम पर यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के छात्रों से ठगी करते थे। गिरोह का एक आरोपी आजमगढ़ निवासी है। एसडीएम मवाना का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है।
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गिरोह का नेटवर्क खंगाले में जुटी पुलिस
एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि पहले कॉलेज को जागृति विहार में फर्जी तरह से चलाया गया था। उसके बाद भटीपुरा के जंगल में कॉलेज खड़ा कर लिया। 2007 में कॉलेज के नाम से संस्था रजिस्टर्ड कराई गई थी। कई अन्य संस्थान का नाम भी इससे जोड़ दिया गया। बरामद दस्तावेजों से चार विश्वविद्यालयों के मिले अनुक्रमांक प्रारूप, मार्कशीट, मुहरें अपने आप में फर्जीवाडे़ का सुबूत हैं। जबकि कमरों से बरामद हुए उपस्थिति रजिस्टर, डाक द्वारा यूनिवर्सिटी को भेजे गए दस्तावेजों की रसीद, बैंक खातों में जमा की गयी रजिस्ट्रेशन फीस की रसीदों से प्रथम दृष्टया फर्जीवाडे़ का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। लेकिन गहन जांच के बाद इस मामले की परतें खुलेंगी। पुलिस का मानना है कि छात्रों की संख्या दिखाकर छात्रवृत्ति का भी खेल हो सकता है।

बैंक की भी हो सकती है मिलीभगत
मौके से बरामद बैंकों की भारी मात्रा में अलग-अलग नामों की पास बुक व चेकबुक को देखकर पुलिस भी हैरान है। जिसमें अन्य विभागों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है। गांव के बीच जंगल में तीन कमरों में कॉलेज चल रहा था और किसी को भनक तक नहीं लगी। 

कॉलेज में काटे जाते थे चोरी के वाहन
एसओ किठौर ने बताया कि कालेज की बिल्डिंग के बाहर एक कटी हुई बाइक मिली है। वहीं गाड़ी के पुर्जे भी इसके अंदर से बरामद हुए हैं। बाइकों के कटे पुर्जों की दो बोरों में प्लास्टिक मिली है। अंदेशा है कि कॉलेज के अंदर चोरी के वाहनों का कटान भी हो रहा था। 
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