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चैत्र नवरात्र: नवरात्र में बन रहा सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्ध योग, शुभ कार्यों में मिलेगी सफलता 

Wed, 30 Mar 2022 10:54 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

पहले नवरात्र पर सर्वार्थसिद्ध योग एवं अमृत सिद्ध योग बन रहा है। इस योग में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलती हैं। इस दिन ग्रहों का संयोग भी अति उत्तम है।
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नवरात्र के लिए पूजा-व्रत सामग्री की खरीदारी शुरू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दो अप्रैल से शुुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में शुभ सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग बन रहा है। इन योगों में किए गए शुभ कार्यों में लोगों को सफलता प्राप्त होगी। इसके अलावा कुंभ राशि में गुरु व शुक्र और मकर राशि में शनि व मंगल का योग होने से लोगों को साहस-पराक्रम के साथ सुख शांति प्राप्त होगी।   
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बागपत जनपद निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा शनिवार दो अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। इस दिन से हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ होगा। संवत्सर का नाम नल और वर्ष के राजा शनि महाराज व मंत्री का पद देव गुरु बृहस्पति के पास रहेगा।

शनि न्याय प्रिय और बृहस्पति अध्यात्म के गुरु है। इस कारण आमजनों को न्याय एवं धर्म दोनों का लाभ मिलेगा। इस बार माता रानी का आगमन घोड़े पर होगा, जो शुभ नहीं है। राजनीति में उथल पुथल के साथ युद्ध की आशंका को भी नकारा नहीं जा सकता है। 
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यह भी पढ़ें: चैत्र नवरात्र: इस बार अश्व पर सवार होकर आएंगी भगवती मां , दो अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र
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पहले नवरात्र पर सर्वार्थसिद्ध योग एवं अमृत सिद्ध योग बन रहा है। इस योग में किए गए शुभ कार्यों में सफलता मिलती हैं। इस दिन ग्रहों का संयोग भी अति उत्तम है। कुंभ राशि में गुरु व शुक्र और मकर राशि में मंगल व शनि का योग साहस पराक्रम के साथ सुख शांति का योग बनाएंगे। चंद्रमा दिन मे 12 बजकर 33 तक मीन राशि में और इसके बाद मेष राशि में प्रवेश करेंगे।

मेष राशि का चंद्रमा मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाता है। नवरात्र पर कलश स्थापना, अनुष्ठान व अखंड दीपक का विशेष महत्व होता है। सोना, चांदी व तांबा का कलश शुभ और मिट्टी का कलश अत्यंत शुभ माना जाता है। शुद्ध देसी घी का अखंड दीपक जलाकर कलश में सभी तीर्थों एवं नदियों का पहले दिन आह्वान किया जाता है। अखंड दीपक पूजा पाठ का साक्षी होता है, जो  हमारे कर्म को ईश्वर तक पहुंचाने का कार्य करता है। 

शास्त्रों में बताया गया है कि स्थिर लग्न में कलश स्थापना करना सफल होता है। शनिवार को सुबह आठ बजकर 34 से दस बजकर 18 तक स्थिर लग्न रहेगा। कलश की स्थापना ईशान कोण में करनी चाहिए। यह स्थान देव स्थान के नाम से जाना जाता है और यह यह जल का भी स्थान है। नौ अप्रैल को दुर्गा अष्टमी व दस अप्रैल को राम नवमी होगी। माता रानी का प्रस्थान इस बार भैंसे पर होगा, जिससे रोग शोक की अधिक रह सकता है। 
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