फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संस्कृत की बही बयार, हुआ कवि सम्मेलन

विज्ञापन
सीसीएसयू के ब्रह्पतिभवन में आयोजित कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते पद्मश्री डा. रमाकांत शुक्ल।
विज्ञापन
मेरठ।
विज्ञापन

संस्कृत के विद्वानों का मंच सजा था। कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई तो माहौल बनता चला गया। कविताओं के साथ तालियों की गूंज भी बढ़ती गई। एक समय ऐसा भी आया जब कवि की हर पंक्ति श्रोता गुनगुनाने लगे। ये नजारा था बुधवार को सीसीएसयू के बृहस्पति भवन में उप्र संस्कृत संस्थान लखनऊ की ओर से आयोजित संस्कृत कवि सम्मेलन का। यहां कवियों ने अपनी रचनाओं से सभी का दिल जीत लिया।
साहित्य अकादमी और पद्मश्री से सम्मानित डॉ. रमाकांत शुक्ल ने काव्य पाठ से श्रोताओं में जोश भर दिया। उन्होंने सुनाया कि अभिमानधना विनयोपेता, शालीना भारत जनता हम। कुलिशादपि कठिना, कुसुमादपि सुकुमारा भारत जनता हम। निवसामि समस्ते संसारे मन्येच कुटुम्बम् वसुन्धराम्, प्रेय श्रेयश्च चिनोम्युभयम, सुविवेका भारत जनता हम। विज्ञान धनाधज्ञान धना, साहित्यकला संगीतपरा, अध्यात्मसुधा कति तृष्णामि परिपूता भारत जनता हम। आयातु यातु लक्ष्मी स्वयं निन्दन्तु नीति निपुणा:, उच्चावच मार्गे गच्छामि सोत्साहा भारत जनता हम।
विज्ञापन

अर्थात् स्वाभिमान ही जिसका धन है, जो विनयशील है, सभ्य है। पत्थर से भी कठोर और फूलों से भी कोमल, ऐसी मैं भारत की जनता हूं। ज्ञान-विज्ञान साहित्य संगीत कला आदि में निपुण अध्यात्म रूपी अमृत पान की तृप्ति से मुक्त मैं भारत की जनता हूं। लक्ष्मी अपनी इच्छा से आए या चली जाए, ज्ञानवान लोग निंदा करें या प्रशंसा, अपने नीति मार्ग पर उत्साहपूर्वक चलने वाली मैं भारत की जनता हूं।
कवि डॉ. राम विनय सिंह ने वर्तमान व्यवस्था पर तंज कसते हुए पढ़ा, रौप्त कथं कोकिला निशीथे ननु नीरवतापुन्जे, दुस्सहदु:ख भारभरिते सम्भ्रमति तौमिरे कुन्जे। डॉ. वागीश जी दिनकर ने कविता सुनाई कि वयं निहत्य स्वार्थतभिसामुष: प्रयामानेव्याम:, जाग्रदूयोजनबद् भूनां वममितिहासं लेखिष्याम:। अर्थात् हमें स्वार्थ की घटा हटाकर नई प्रभा छिटकानी है, हम इतिहास लिखेंगे, उनका जिनकी सजग जवानी है, से जोश भर दिया। इसके अलावा डॉ. महेश झा, डॉ. चिंतामणि जोशी, स्वामी नारायण दत्त शर्मा, डॉ. निरंजन मिश्र, डॉ. शैलेश तिवारी, डॉ. विशनलाल गौड़, डॉ. कन्हैयालाल पाराशर, डॉ. वेदव्रत शास्त्री, डॉ. तुषा शर्मा, डॉ. मधुसूदन मिश्र, डॉ. हिमांशु गौड़, डॉ. सर्वेश त्रिपाठी, डॉ. हरिदत्त शर्मा, डॉ. युवराज भट्टराई ने भी काव्य पाठ किया।
विज्ञापन

इनका रहा योगदान
कार्यक्रम की अध्यक्षता उप्र संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ. वाचस्पति मिश्र ने की। संयोजिका चित तरंगिणी पत्रिका की प्रधान संपादक आराधना आनंद रहीं। संचालन संयोजक डॉ. अरविंद तिवारी ने किया। डॉ. संतोष कुमारी, सोनू पंवार, डॉ. राजवीर आचार्य, डॉ. नरेंद्र, डॉ. ओमपाल शास्त्री का सहयोग रहा। इस मौके पर सभी संस्कृत कवियों के साथ हिंदी के क्षेत्र में काम करने वाले गण्यमान्यों को सम्मानित किया गया। इनमें वरिष्ठ कवि डॉ. ईश्वर चंद्र गंभीर, डॉ. सोबरन सिंह आचार्य, डॉ. राजेश्वरा आचार्य, एडवोकेट शिवानंद शर्मा शामिल रहे। कवि सम्मेलन से पहले सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक छंदों रचना प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें गुरुकुल और कई स्कूलों के कक्षा आठ से लेकर शोध केे 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें