लेकिन उसका दाखिल खारिज नहीं हुआ। जिसके बाद कोर्ट ने आबिद का बैनामा खारिज कर दिया। लेकिन तीन साल बाद साल 2005 में इस जमीन का बैनामा आबिद से पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी ने करा लिया। सवाल उठता है कि फर्जी बैनामे से याकूब ने कैसे बैनामा कर दिया। इसको लेकर पुलिस ने पूर्व मंत्री के पक्ष से सारे दस्तावेज मांगे थे। जिसको वह एक सप्ताह में नहीं दे सके।
सीओ किठौर आलोक सिंह का कहना है कि जांच में याकूब कुरैशी के खिलाफ सबूत मिले हैं। सभी बिंदु पर जांच चल रही है।
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