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यूपी: बसपा का हुआ ऐसा हाल, पांच साल में घट गए 55 फीसदी वोट, पढ़िए पश्चिमी यूपी की पूरी रिपोर्ट

Sat, 12 Mar 2022 05:21 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

इस बार पार्टी प्रत्याशी 166866 मत ही पा सके हैं। यानी 2017 के मुकाबले इस बार पार्टी के 205036 मत कम हो गए। इस मामले में बसपा के कोर्डिनेटर दिनेश काजीपुर ने कहा कि जितना हो सकता उतना किया गया। यह बात सही है कि बसपा के दलित बेस वोट बैंक में गिरावट आयी है। बहनजी शीघ्र ही इसके सुधार के लिए कुछ निर्णय लेंगी। 
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बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा चुनाव नतीजों से बसपा के संगठन, वजूद और भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2017 में मिले मतों के मुकाबले बसपा मेरठ की सात विधानसभा सीटों पर सिर्फ 45 प्रतिशत दलितों को ही साधे रख सकी। यानी 55 फीसदी दलित मतदाता बड़ी संख्या में भाजपा और कुछ संख्या में सपा-रालोद पर भी शिफ्ट हो गया। 

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सियासी दलों के गुणाभाग के अनुसार जिले की सात विधानसभा सीटों पर 477000 हजार दलित मतदाता हैं। इनमें से करीब 65 फीसदी यानी 310050 ने मतदान किया है। सभी सात सीटों पर बसपा प्रत्याशियों को कुल 166866 मत मिले हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सभी सात सीटों पर बसपा को 371902 मत मिले थे। 

इस बार पार्टी प्रत्याशी 166866 मत ही पा सके हैं। यानी 2017 के मुकाबले इस बार पार्टी के 205036 मत कम हो गए। हालांकि एक सवाल यह भी है कि 2017 में पार्टी की तरफ मुस्लिम मतों का भी रुझान था जो इस बार पूरी तरह सपा की ओर हो गया।
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यह भी पढ़ें: यूपी: टिकैत के गांव से फिर सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े, भाजपा के वोटों की संख्या देख सब हैरान

बूथवार रिपोर्ट बता रही है कि अधिकांश सीटों पर दलित मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की तरफ चला गया जबकि कुछ हिस्सा सपा-रालोद गठबंधन को भी मिला है। इसमें सीटवार स्थानीय गणित ने भी अहम भूमिका निभाई है। मेरठ दक्षिण, शहर, किठौर और सिवालखास में दलितों का काफी हिस्सा भाजपा की तरफ चला गया। वहीं सरधना में सपा की हिस्सेदारी ज्यादा रही। 

2017 के मुकाबले 2022 में मिले मत 
 सीट                    2017        2022         कितने घटे वोट 
 हस्तिनापुर            63374    14240            49134
 किठौर                 62503    31213           31290
 शहर                   12636    4939              7697
 सिवालखास           42524    29958           12566
 कैंट                    55899      28519           27380
 सरधना                57239    18140             39099
 दक्षिण                  77727    39857             37870
 योग                    371902   166866          205036        

मैं तीन जिलों की 13 विधानसभा सीटें देख रहा था। पार्टी ने जहां की जिम्मेदारी सौंपी, वहां पहुंचा। राजकुमार गौतम और शमशुद्दीन राईन भी मेरठ आए। जितना हो सकता उतना किया गया। यह बात सही है कि बसपा के दलित बेस वोट बैंक में गिरावट आयी है। बहनजी शीघ्र ही इसके सुधार के लिए कुछ निर्णय लेंगी। - दिनेश काजीपुर, कोर्डिनेटर बसपा।
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ये बोले बसपा प्रत्याशी
चुनाव को लेकर गंभीर नहीं रहा बसपा हाईकमान 
मेेरठ में भाजपा, सपा गठबंधन के बड़े नेता चुनाव प्रचार करने पहुंचे, लेकिन बसपा से कोई नहीं आया। संगठन का भी कोई सहयोग नहीं मिला। दलित और मुस्लिमों ने मान लिया की बसपा चुनाव लड़ ही नहीं रही है। यही कारण है कि दलित भाजपा और सपा गठबंधन की तरफ खिसक गया। हमें केवल 20 हजार दलित, सात हजार मुस्लिम और तीन हजार अन्य मत मिले हैं। जनता ने बहुत साथ दिया। -नन्हें खां, बसपा प्रत्याशी सिवालखास

अकेला लड़ता रहा, नहीं मिला पार्टी नेताओं का साथ 
पार्टी की तरफ से दलित वोट बैंक को कोई संदेश ही नहीं दिया गया। यही कारण है कि क्षेत्र के गांव सलावा, भामोरी, रार्धना, खेड़ा आदि गांवों में दलितों के कहीं दो तो कहीं पांच वोट मिले हैं। बसपा के दलित, मुस्लिम और अन्य किसी नेता ने चुनाव प्रचार में भाग ही नहीं लिया। सरधना हॉट सीट होने और भाजपा के सीएम और सभी बड़े नेताओं के पहुंचने के बाद भी बसपा हाईकमान ने कोई निर्णय नहीं लिया। बसपा का परंपरागत वोटर दूसरों के साथ हो लिया। हमें 14 हजार दलित, दो हजार जाट और कुछ अन्य मिले हैं। - संजीव धामा, बसपा प्रत्याशी सरधना

बड़े नेता सामने ही नहीं आए, छिटक लिया दलित वोटर 
कैंट में सीएम भाजपा के लिए वोट मांगने पहुंचे, लेकिन बसपा का कोई बड़ा नेता सामने नहीं आया। संगठन पूरी तरह शून्य है। दलित वोटर में निराशा रही और भाजपा व सपा के साथ हो लिया। मैं करारी हार से बेहद दुखी हूं। हमें केवल अपने संबंधों की वोट मिली है। अवसर मिला तो बहनजी को पूरी व्यवस्था से अवगत कराऊंगा। बसपा को आगे बढ़ाने के लिए संगठन में काफी परिवर्तन और सभी जातियों को साथ लेकर चलने की जरूरत है। दलित वोट बैंक को रोकने के लिए भी काम करने की जरूरत है। - अमित शर्मा, बसपा प्रत्याशी कैंट
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