बताया गया कि परिजन फरवरी माह में उसकी शादी करना चाहते थे, लेकिन इससे पहले ही शहादत की खबर आ गई। विनोद की मां मूर्ति देवी गांव में अकेली रहती हैं। यहीं पर उसके ताऊ का परिवार रहता है। जानकारी मिलने के बाद वह पिता और दोनों भाई अन्य परिजनों के साथ पानीपत से दोपहर तक गांव पहुंच गए। मां मूर्ति देवी को विनोद कुमार के शहीद हो जाने की खबर कई घंटे बाद दी गई। यह खबर सुनते ही वह बेहोश हो गई। परिवार एवं गांव का हर व्यक्ति बार-बार विनोद कुमार को याद कर रहा था।
बुधवार शाम बड़े भाई से हुई थी बात
बीएसएफ जवान की बुधवार शाम ही अपने बड़े भाई संजीव से बात हुई थी। फोन पर उसने परिजनों का हालचाल पूछा था। साथ ही परिवार एवं कामकाज से जुड़ी अन्य जानकारियां भी ली थी। परिजनों को यह नहीं मालूम था कि उनकी विनोद से यह आखिरी बार बात हो रही है। तयेरे भाई कुलदीप ने बताया कि अक्सर परिवार के लोगों से विनोद की बातचीत होती रहती थी। गुरुवार सुबह करीब चार बजे उनके भांजे के फोन पर बीएसएफ के अधिकारियों ने कॉल करके विनोद की शहादत की जानकारी दी।
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