उन्होंने कहा कि लोग आध्यात्मिकता को धार्मिक संगठन से जोड़ते हैं जबकि आध्यात्मिकता जीवन से जुड़ी भावनाओं को दर्शाता है। सकारात्मक ऊर्जा के बिना हम जीवन में किसी भी कार्य को नहीं कर सकते। इसका धार्मिक गतिविधियों से लेना-देना नहीं है। यह केवल एक सूत्र है, जिससे हम परमात्मा के भाव को समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रश्न मनुष्य को प्रसन्नचित होने से दूर करते हैं, और निश्चय निश्चिंतता की ओर ले जाता है।
चित्त की शांति के लिए ध्यान जरूरी
ओम शांति के उच्चारण से मन को शांति मिलती है। रोजाना खुद के लिए आधा घंटा निकालकर ध्यान जरूर करें। इससे मन के भीतर की नकारात्मकता दूर होती है और नया कार्य करने के लिए सकारात्मकता उतपन्न होती है।
इस दौरान ब्रहमकुमारी सोनम ने सभी को 2 मिनट को मौन कराया। उन्होंने बताया कि सिर्फ इन चंद मिनटों में हम पूरे दिन की नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं। ओम शांति....ओम शांति से इस मौन को आरंभ करें। इसके बाद मस्तिष्क के दूसरे विचारों को त्याग कर अपनी भीतर झांके और सभी त्रुटियों को निकाल दें।