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पिता की तेरहवीं छोड़ नम आंखों से बॉक्सिंग खेलने पहुंचा विजय, ये है देश के लिए सपना

Fri, 27 Dec 2019 11:24 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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कोच के साथ विजय चहल - फोटो : अमर उजाला
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आगे बढ़ने की जिद न जाने कितने इम्तिहान लेती है। बॉक्सिंग को जुनून की हद तक जीने वाले कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के बॉक्सर विजय चहल भी ऐसी ही परीक्षा से दो-चार हुए। घर में पिता की तेरहवीं छोड़कर विजय को ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ा। आंखों में दर्द लिए विजय का कहना है कि उसका सपना पदक जीतने का है।

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हरियाणा के कैथल जिले के भैणी माजरा गांव निवासी विजय चहल 91 किलोग्राम भार वर्ग के बॉक्सर हैं। आरकेएसडी कॉलेज कैथल में बीए अंतिम वर्ष के छात्र विजय ने बताया कि कुरुक्षेत्र में यूनिवर्सिटी के ट्रायल के बाद वह घर पहुंचा। टीम में चयन होने से वह बेहद खुश था, लेकिन घर पहुंचते ही पता चला कि उसके पिता महासिंह का निधन हो गया है। 

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शुक्रवार को कैथल में उसके पिता की तेरहवीं हुई, लेकिन वह बागपत के एसपीआरसी डिग्री कॉलेज में चल रही ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग में खेलने पहुंचा। गमजदा परिवार, कोच और खिलाड़ियों ने उसका हौसला बढ़ाया। विजय चहल का मुकाबला शनिवार सुबह है, मगर उसका शुक्रवार को पहुंचना जरूरी था। वह कहता है कि पिता ने उसे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस दुख की घड़ी में परिवार से दूर रहना उसे सालता रहा।
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यूथ नेशनल खेलों में जीत चुका पदक
चंडीगढ़ में हुई ऑल इंडिया बॉक्सिंग में विजय चहल ने कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा यूथ नेशनल खेलों में वह सिल्वर पदक जीत चुका है। विजय का कहना है कि देश के लिए खेलना उसका सपना है।

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