40 हजार का कंप्यूटर सवा लाख में खरीदा
बिजनौर। किसान सेवा सहकारी समिति लिमिटेड अकबराबाद में 40 हजार रुपये कीमत का कंप्यूटर सवा लाख रुपये में खरीदे जाने का मामला सामने आया है। यह खुलासा समिति की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। इतना ही नहीं गबन, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के करीब 85.80 लाख रुपये के मामले पकड़े गए हैं। ऑडिट रिपोर्ट के बाद मामले की जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी तहसील धामपुर सुरेशपाल को दी गई है।
सहकारी वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी सुनील कुमार की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार समिति के सचिव सुरेंद्र कुमार एवं उनके अधीनस्थों ने तीन लाख 35 हजार 882 रुपये का गबन किया है। एक लाख 74 हजार 638 रुपये के दुरुपयोग व 80 लाख 70 हजार 252 की वित्तीय अनियमितताएं की हैं। जांच में पाया गया कि समिति सचिव ने लगभग 40 हजार कीमत वाले कंप्यूटर को एक लाख 26 हजार 650 रुपये में खरीदा है। बकाएदार से बिना जुर्माना लिए 19 हजार 647 रुपये की कम वसूली की गई। एबी इलेक्ट्रोनिक्स बिजनौर को 22 हजार 340 रुपये के भुगतान में अनियमितता पाई गई।
जांच में पाया गया कि पिछले ऋण को वसूल किए बिना दो लाख 74 हजार 182 रुपये का ऋण पुन: जारी कर दिया गया। अनपेड चेक संतुलन पत्र में दर्शाकर 61 हजार 700 रुपये का भुगतान कर दिया गया। ब्याज के रूप में कम वसूले गए दो लाख 46 हजार 291 रुपये और 75 लाख 34 हजार 422 रुपये का प्रावधान एनपीए में नहीं किया गया। इससे समिति का लाभ हानि का खाता प्रभावित हुआ। यात्रा भत्ता का प्रावधान न होने के बावजूद यात्रा भत्ता, फोटो स्टेट व अन्य मदों में धनराशि खर्च करके समिति को वित्तीय हानि पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद पूर्व सचिव सुरेंद्र कुमार व लिपिक ने कुछ धनराशि भी समिति के खाते में जमा कराई गई है। सहकारी वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि समिति की जांच में कई अनियमितताएं मिली हैं। इसकी जांच रिपोर्ट प्रेषित कर दी गई है। सहायक निबंधक सहकारिता अमित त्यागी ने बताया कि जांच शुरू करा दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
पंचायत सचिव और अधिकारियों की संपत्ति की जांच की मांग
विश्व दलित परिषद ने एसडीएम को ज्ञापन में आरोप लगाया कि 2500 रुपये की ठेली 25 हजार रुपये में खरीदी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। विश्व दलित परिषद ने मुख्यमंत्री से जनपद की पंचायतों के सचिव और पंचायत विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की संपत्ति की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के विकास कार्यों में एक सौ करोड़ रुपये से भी ज्यादा का घोटाला है। उन्होंने पंचायतों के पिछले पांच साल में हुए विकास कार्यों की भी सीबीआई जांच कराने की मांग की।
शनिवार को एसडीएम बिजनौर को मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में विश्व दलित परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले पांच साल में पंचायत में जमकर पैसे का बंदरबांट की गई। पंचायत सचिवों ने अपने-अपने परिवारजनों के नाम गाजियाबाद, नोएडा, हरिद्वार और अन्य जगह संपत्ति ली है। शिकायत में कहा कि कूड़ा उठाने वाली 2500 रुपयेे की ठेली का 25 हजार रुपये भुगतान कराया गया। एक ही माडल की फॉगिंग मशीन 13 से 60 हजार रुपये में खरीदी गई। इनकी वास्तविक कीमत 13 हजार के आसपास ही है। प्रधान भी इसमें शामिल रहे। सचिवों ने प्रधानों के डूडल (डिजीटल हस्ताक्षर डिवाइस) अपने पास रख रखी हैं। विकास खंड में तैनात आरईएस के अवर अभियंता खुद मौके पर नहीं जाते हैं और न ही खुद स्टीमेट बनाते हैं। मनरेगा के कार्यों के लेखा का हिसाब किताब को रखे गए अधिकतर संविदा कर्मचारी ये स्टीमेट बनाते हैं। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन में जांच शुरू नहीं हुई तो उनका संगठन आंदोलन करेगा। ज्ञापन देने वालों में राष्ट्रीय महासचिव बेगराज सिंह, जोगेंद्र सिंह, पूनीत कुमार चौहान, गौतम आदि शामिल रहे।